नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली पार्टी JDU फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इस बार के चुनाव को लेकर पार्टी ने खास रणनीति बनाई है। पार्टी ने पूर्व के कई चुनावों के समीकरण की समीक्षा सीख ली है। पिछली बार के चुनावों में कुशवाहा समाज में हुई सेंधमारी को पार्टी नहीं भूली है। इस बार विधानसभा चुनाव में वैसे नुकसान और अन्य दल की घुसपैठ को रोकने के लिए पार्टी पहले से ही सतर्क है।
बिहार में इस बार के विधानसभा चुनाव को लेकर JDU के खास रणनीतिक प्लान तैयार किया है। पिछली बार के चुनवों में हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए इस बार कुशवाहा समाज के हित में निर्णय करने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार जेडीयू कुशवाहा जाति से 16 उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। जेडीयू में ये चर्चा है कि पार्टी के रणनीतिकारों ने कुछ उम्मीदवारों को हरी झंडी भी दे दी है। इस बार पार्टी के कई दिग्गज चेहरे सामने आए हैं।
नीतीश कुमार के करीबी उमेश कुशवाहा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे करीबी और खास नेताओं में उमेश कुशवाहा का नाम सबसे ज्यादा उछल रहा है। उमेश कुशवाहा महानगर विधानसभा पर मजबूत पकड़ा रखते हैं। उन्होंने पहली बार वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में 27,000 मतों के बड़े अंतर से बीजेपी प्रत्याशी को मात दी थी। उमेश कुशवाहा तब महागठबंधन के उम्मीदवार थे, जिसमें आरजेडी और जेडीयू शामिल थे।
लेकिन फिर राजनीतिक मतभेद के चलते यह महागठबंधन टूट गया। उमेश कुशवाहा दूसरी बार विधानसभा चुनाव 2020 के चुनावी मैदान में उतरे पर यहां राजद के कद्दावर नेता राम किशोर सिंह की पत्नी वीणा देवी से हार मिली। अब इस बार उमेश कुशवाहा को फिर से मैदान में उतारा जा सकता है। पर ये तय नहीं कि वह महानगर विधानसभा से लड़ेंगे या फिर कोई नई सीट।
दूसरा सबसे चर्चित चेहरा भगवान सिंह कुशवाहा
कुशवाहा समुदाय में गहरी पैठ रखने वाले जेडीयू के नेता और सीएम नीतीश के करीब भगवान सिंह कुशवाहा का नाम भी प्रमुखता से सामने आ रहा है। भगवान सिंह कुशवाहा का क्षेत्र जगदीशपुर रहा है। वे पहली बार विधायकी वाम दल IPF की पार्टी से वर्ष 1990 में जीते थे। वर्ष 2000 में दूसरी बार जगदीशपुर से समता पार्टी से चुनाव जीते।
फिर JDU में हुई वापसी
वर्ष 2005 फरवरी और वर्ष 2005 नवंबर का विधानसभा चुनाव जीत कर जेडीयू की टिकट पर विधायक बने। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव LJP से मैदान पर उतरे लेकिन राजद उम्मीदवार से हार गए। हालांकि, लोजपा का कार्यकाल बहुत ज्यादा नहीं रहा। फिर उनकी जेडीयू में वापसी हो गई। इस दौरान नीतीश कुमार ने इन्हें MLC बनाया। जेडीयू के भीतर भगवान सिंह कुशवाहा के जगदीशपुर विधानसभा से लड़ने की खबर है।
इस बार जयंत राज का नाम चर्चा में
जयंत राज कुशवाहा एक राजनीति विशेषज्ञ हैं। ये अमरपुर से विधायक रहे, जनार्दन मांझी के पुत्र हैं। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जयंत राज पहली बार उतरे। 2020 के चुनाव में, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के जितेंद्र सिंह को हराया। राज को 33.13% वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे सिंह को 31.23% वोट मिले। पहली बार विधायक बनने के बावजूद नीतीश कुमार ने जयंत राज को मंत्री बनाया।
अब आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी जयंत राज को फिर टिकट मिलने की चर्चा है। इसके अलावा भी कुछ कुशवाहा नेताओं के चुनाव लड़ने की चर्चा है। इनमें जहानाबाद से संतोष कुशवाहा, पाली से नंदकिशोर कुशवाहा और रामसेवक सिंह कुशवाहा के नाम सामने आए है।
NDA को लोकसभा चुनाव में लगा चुका बड़ा झटका
पिछले लोकसभा चुनाव के आंकड़ो पर नजर डाले तो यहां पर राजद ने कुशवाहा और वैश्य मत में सेंधमारी कर NDA को एक बड़ा झटका दिया था। शाहाबाद की तो चारों लोकसभा सीटें NDA हार गई थी। इसने काराकाट, सासाराम, आरा और बिहार का औरंगाबाद लोकसभा भी शामिल था।
इसके अलावा, नीतीश कुमार के दो सांसदों ने भी अपनी सीट गंवा दी। कटिहार से दुलाल चंद गोस्वामी और पूर्णिया से संतोष कुशवाहा चुनाव हार गए। इस हार से सीख लेकर NDA बिहार विधानसभा में कुशवाहा जाति से ज्यादा उम्मीदवार उतारने का निर्णय भी कर चुका है।




