नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में बजट सत्र के बीच महागठबंधन की बैठक हुई, जिसमें सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई। यह बैठक नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अगुवाई में आरजेडी विधायक आलोक कुमार मेहता के सरकारी आवास पर हुई। इसमें आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों के विधायक शामिल हुए।
तेजस्वी ने गिनाए मुद्दे, कहा- जनता के हक की होगी लड़ाई
बैठक में तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, किसानों, छात्रों और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सदन में जोर-शोर से उठाएगा। उन्होंने कहा कि बीपीएससी छात्रों के साथ हो रही नाइंसाफी को भी महागठबंधन मुद्दा बनाएगा। कुछ कांग्रेस विधायकों ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाए, लेकिन सीपीआईएमएल विधायक सत्येंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस आलाकमान की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए इन बयानों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दोहराया कि महागठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव ही करेंगे।
बड़े दल का नेता ही होगा मुख्यमंत्री
कांग्रेस विधायक विजय शंकर दुबे ने कहा कि महागठबंधन में हमेशा बड़े दल के नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जाता है। ऐसे में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव स्वाभाविक रूप से गठबंधन का चेहरा होंगे।
सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप, बजट को बताया निराशाजनक
CPIML के विधायक सत्येंद्र यादव ने कहा कि बिहार सरकार भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी हुई है। बजट में मजदूरों, किसानों, छात्रों और दलितों के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के रूप में महागठबंधन जनता के हक की आवाज बुलंद करेगा। तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन आगामी विधानसभा चुनाव में 150 सीटें जीत सकता है। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार अब दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे और महागठबंधन की सरकार बनेगी। जनता को बताना है कि जंगलराज वाला एनडीए का शगूफा अब नहीं चलेगा. आरजेडी के शासनकाल में जो काम किए गए उन कामों का डेटा लेकर विधायक जनता के बीच जाएं. नीतीश सरकार के खिलाफ जो नाराजगी है उन बिंदुओं पर सरकार को घेरना है. महागठबंधन में शामिल घटक दलों के नेताओं की संयुक्त बैठक भी आगे जिलों में होगी।





