नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन और मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे के बाद सियासी गलियारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अपने पास से गृह विभाग डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिए जाने पर चल रही चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस मामले पर अब केंद्रीय मंत्री और ‘हम’ (HAM) प्रमुख जीतन राम मांझी ने बड़ा बयान दिया है। मांझी ने इस फैसले को राज्य की अच्छाई और गठबंधन धर्म का समायोजन बताते हुए विपक्ष की अटकलों को खारिज करने की कोशिश की है।
‘गठबंधन धर्म’ में एडजस्टमेंट की बात
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार द्वारा गृह विभाग को छोड़ने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
मांझी ने कहा, यह सही बात है कि अमूमन मुख्यमंत्री गृह विभाग अपने पास रखते हैं, लेकिन ऐसा कोई कानून नहीं है। बहुत से राज्यों में यह जिम्मेदारी दूसरे मंत्री भी संभालते हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह गठबंधन की सरकार है और इसमें एडजस्टमेंट (समायोजन) करना पड़ता है, इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता।मांझी ने साफ किया कि, उनके हिसाब से इसे लेकर बात बढ़ाना उचित नहीं है, क्योंकि यह फैसला राज्य के हित में हुआ है।
नीतीश ने क्यों छोड़ा गृह विभाग?
जीतन राम मांझी ने इस फैसले के पीछे के तर्क को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इरादों को स्पष्ट किया।उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार ने अपनी सुविधा या कार्य की अधिकता के चलते यह विभाग छोड़ा है।मांझी ने कहा, उन्होंने एक युवा नेता के हाथ में गृह विभाग को सौंपा है। यह कार्य कुशलता को देखते हुए युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत है।
मांझी के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य कानून व्यवस्था में सुधार लाना है। युवा मंत्री खुद चीजों को देखेंगे, समझेंगे और उसके अनुसार कार्रवाई करेंगे। मेरे समझ से कानून व्यवस्था पर भी लगाम लगने की बात होगी।उन्होंने इस बात का भी संकेत दिया कि बीजेपी ज्यादा सीटें जीतकर आई है, इसलिए उन्हें गृह जैसा महत्वपूर्ण विभाग दिया गया, ताकि वे सहज महसूस करें।
कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ आंदोलन पर मांझी का पलटवार
जब मांझी से कांग्रेस द्वारा ‘वोट चोरी’ के खिलाफ 14 दिसंबर को दिल्ली में प्रस्तावित रैली के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वालों ने एक ही रट लगा रखी है और वे हमेशा वोट चोरी की बात करते हैं। मांझी ने पुराने आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि, बिहार में भी कई दिनों तक इसे लेकर यात्राएं की थीं लेकिन इस राज्य के लोगों ने उन्हें नकार दिया। उन्होंने कहा कि, एनडीए की इतनी बड़ी जीत यह साबित करती है कि लोगों ने विपक्ष के आरोपों को मान्यता नहीं दी। इसलिए, इन दलों को सबक लेना चाहिए।बिहार में गृह विभाग को लेकर राजनीतिक हलचल अभी थमी नहीं है, वहीं नीतीश कुमार की रणनीति और युवा नेतृत्व को मौका देने का कदम भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है।





