नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया गठबंधन ने लगातार निर्वाचन आयोग और सत्तधारी दल पर वोट चोरी और बिहार एसआईआर में धांधली के आरोप लगाए हैं। बीते कई दिनो से देश में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और एसआईआर हेराफेरी का मुद्दा गरमाया हुआ है।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के लगातार ‘वोट चोरी’ वाले आरोप और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। हालांकि, विपक्ष के इन आरोपों चुनाव आयोग ने झूठ और निराधार बताया है।
लेकिन इस बीच, मुख्य विपक्षी दल और इंडिया गठबंधन से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे है। सूत्रों के मुताबिक, कई विपक्षी दल इस बात पर मंथन कर रहे हैं।
महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयार में विपक्ष
कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पार्टी के भीतर अभी तक कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो नियमों के अनुसार कांग्रेस महाभियोग प्रस्ताव ला सकती है।
चुनाव आयोग ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने दिल्ली में रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि उस पर लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ जैसे झूठे आरोपों से न तो आयोग डरता है और न ही वोटर। आयोग ने विपक्ष के सभी आरोपों को निराधार बताया और लोगों से अपील की कि वे संविधान में मिले अधिकार का इस्तेमाल करते हुए हर हाल में मतदान करें।
साथ ही चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि देश के सभी राजनीतिक दलों का पंजीकरण चुनाव आयोग ही करता है और उसकी नजर में न कोई पक्ष है, न विपक्ष है, सभी समकक्ष हैं।
SIR के खिलाफ लामबंद विपक्ष
आगामी कुछ दिनों में बिहार में विधानसभा चुनाव होने है, इससे पहले ठीक चुनाव आयोग ने राज्य की वोटर लिस्ट को सटीक करने के लिए राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया था, जिसका विपक्षी दल कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र में भी बहस छिड़ गई है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
हाल ही में SIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह बिहार में वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 65 लाख नामों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे और साथ ही यह भी बताए कि किन कारणों से उन्हें हटाया गया। आयोग ने कोर्ट से कहा थ कि वह इस पर अमल करेगा।





