नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार सरकार ने परंपरागत लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य के छह शहरों पटना, गया, छपरा, सहरसा, भागलपुर और बेगूसराय में गैस LPG आधारित शवदाह गृह बनाए जाएंगे।
ईशा फाउंडेशन करेगा निर्माण और संचालन
इस परियोजना को लेकर राज्य सरकार और कोयम्बटूर स्थित ईशा फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। फाउंडेशन ही इन शवदाह गृहों का निर्माण और संचालन करेगा। सरकार ने प्रत्येक शहर में एक एकड़ जमीन सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर 33 साल की लीज पर उपलब्ध कराई है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा शवदाह गृह
सम्राट चौधरी ने बताया कि अभी अधिकतर नगर निकायों द्वारा संचालित शवदाह स्थलों पर लकड़ी से अंतिम संस्कार होता है। इससे न केवल हवा प्रदूषित होती है बल्कि बड़ी मात्रा में लकड़ी की खपत से वन संपदा पर भी दबाव पड़ता है। विद्युत शवदाह गृह कुछ स्थानों पर बने जरूर हैं, लेकिन वहां रखरखाव और यात्रियों के लिए सुविधाओं की कमी रहती है। गैस आधारित शवदाह गृह इन सभी समस्याओं का समाधान करेंगे और लोगों को स्वच्छ व सम्मानजनक माहौल प्रदान करेंगे।
तमिलनाडु में पहले से चल रही सफल परियोजना
ईशा फाउंडेशन तमिलनाडु में पहले ही करीब 15 गैस आधारित शवदाह गृह बना चुका है। ये सभी पर्यावरण अनुकूल तकनीक और आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। अब वही मॉडल बिहार के छह बड़े शहरों में लागू किया जाएगा।
समाज के लिए कल्याणकारी सोच
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल एनडीए सरकार की लोक-कल्याणकारी सोच का हिस्सा है। इससे न केवल प्रदूषण और जंगलों के अंधाधुंध कटान पर रोक लगेगी, बल्कि अंतिम संस्कार स्थलों पर साफ-सफाई और बेहतर प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। बिहार के छह शहरों में गैस आधारित शवदाह गृह बनने से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित होंगी। सरकार का मानना है कि यह समाज के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित होगा।





