नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं। पिछले 6 महीनों में आयोग ने कुल 30 बदलाव किए हैं। इनमें मतदाताओं की सुविधा, अधिकारियों की ट्रेनिंग, सुरक्षा इंतजाम और वोटिंग-काउंटिंग की नई प्रक्रिया शामिल है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर वोट चोरी और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाता रहा है। इसी वजह से आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है।
बैलेट गिनती पूरी होने के बाद ही खुलेगी EVM
सबसे अहम बदलाव वोटों की गिनती से जुड़ा है। अब पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने तक EVM नहीं खोली जाएगी। पहले बैलेट गिनती सुबह 8 बजे और EVM गिनती 8:30 बजे से शुरू होती थी, लेकिन अब गिनती की शुरुआत बैलेट से होगी और उसके बाद ही EVM खोले जाएंगे।
पोलिंग बूथ पर नई व्यवस्थाएँ
वोटर अब मतदान केंद्र पर अपना मोबाइल जमा कर सकेंगे। एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही होंगे, ताकि ज्यादा भीड़ न हो, प्रत्याशी केवल 100 मीटर दूर तक ही टेबल लगा सकेंगे। अब EVM पर प्रत्याशी की फोटो रंगीन (कलर्ड) होगी और नाम बड़े अक्षरों में लिखा जाएगा
मतदाता और स्टाफ की सुविधा पर फोकस
मतदाता सूचना पर्ची (VIS) का डिजाइन बदला गया है। बीएलओ के लिए पहचान पत्र जारी किया जाएगा। बीएलओ, सुपरवाइजर और पोलिंग स्टाफ की सैलरी बढ़ाई गई है। चुनावी जानकारी के लिए ECINET पोर्टल लांच किया गया है, जिसमें 40 से ज्यादा ऐप्स और वेबसाइट्स एक साथ उपलब्ध हैं। वोटर को अब EPIC कार्ड 15 दिन में ही मैसेज के जरिए उपलब्ध होने की जानकारी दी जाएगी।
टेक्नोलॉजी और पारदर्शिता पर जोर
चुनाव आयोग ने 808 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को RUPP लिस्ट से हटाया है। VVPAT और EVM डेटा में फर्क होने पर अब अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी। मतदान केंद्रों पर लाइव प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी। परिणाम के दिन हर दो घंटे में वोटर टर्नआउट की जानकारी ECINET पोर्टल पर मिलेगी। बायोमेट्रिक और ई-ऑफिस सिस्टम को और सरल बनाया गया है।
ट्रेनिंग और बैठकें
देशभर में 28 हजार से ज्यादा नेताओं के साथ 5 हजार सर्वदलीय बैठकें की गईं। 7 हजार बीएलओ और पर्यवेक्षकों को अलग-अलग ट्रेनिंग दी गई। बिहार में पुलिस अधिकारियों को विशेष ट्रेनिंग दी गई। मीडिया कोऑर्डिनेटर्स के लिए भी स्पेशल सेशन आयोजित किए गए।
क्यों किए गए ये बदलाव?
चुनाव आयोग का कहना है कि इन बदलावों का मकसद मतदाताओं को आसानी देना और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को कम करना है। आयोग का दावा है कि इन सुधारों से चुनाव अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय होंगे।




