नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार की राजनीति में अपराध हमेशा एक अहम चुनावी मुद्दा रहा है। लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल को विरोधी अक्सर ‘जंगलराज’ कहकर निशाना बनाता रहा है, जो कि उस दौर में कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति का प्रतीक बन चुका था। नीतीश कुमार और एनडीए के नेता सालों तक इसी शब्द का इस्तेमाल कर लालू-राबड़ी शासन को घेरते रहे। लेकिन अब जब बिहार में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, तो यह देखना दिलचस्प है कि इस बार ‘जंगलराज’ शब्द लगभग गायब है। ‘जंगलराज’ वही शब्द है, जिसे कभी नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे मारक हथियार माना जाता था। 18 जुलाई 2025 को मोतिहारी में आयोजित एक बड़ी रैली में भी इसकी कोई गूंज नहीं सुनाई दी। अब सवाल उठता है कि क्या नीतीश और एनडीए इस मुद्दे से दूरी बना रहे हैं?
नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ के दावे पर उठ रहे सवाल
दरअसल, बिहार में हाल के समय में अपराध की घटनाओं में भारी इजाफा देखा जा रहा है। राजधानी पटना में भी सभ्य और सम्मानित नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं। यहां कारोबारियों से लेकर गैंगस्टरों तक के बीच खुलेआम खूनी संघर्ष हो रहा है। चाहे वह कारोबारी गोपाल खेमका की भयावह हत्या हो या रेत कारोबारी या दुकानदार की हत्या की कोई घटना, हालात चिंता बढ़ा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात तब हुई जब पटना के एक बड़े अस्पताल में अपराधियों ने घुसकर एक गैंगस्टर की हत्या कर दी, जबकि न तो अस्पताल के गार्ड ने कुछ कर दिखाया और न ही पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकी। बाद में पुलिस द्वारा दर्ज की गईं गिरफ्तारी के दावों के बावजूद, बिहार के अन्य शहरों और जिलों से भी हत्या की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ के दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि बिहार में अब कानून का राज खत्म हो चुका है और पुलिस का हौसला टूटा हुआ है। यह सब उस वक्त हो रहा है जब बिहार विधानसभा चुनाव बेहद करीब है।
‘जंगलराज’ का गायब होना
बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने स्वाभाविक रूप से नीतीश सरकार की छवि को धक्का पहुँचाया है। जो लोग पहले हर मुद्दे पर लालू-राबड़ी के शासनकाल के ‘जंगलराज’ का जिक्र करते थे, वे अब इस शब्द का इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं।
18 जुलाई 2025 को मोतिहारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी जनसभा आयोजित हुई, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कई नेताओं ने अपनी बात रखी, लेकिन उस सभा में ‘जंगलराज’ शब्द कहीं भी सुनाई नहीं दिया। यह वही शब्द था, जो कभी नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे प्रभावी हथियार माना जाता था, लेकिन अब वह पूरी तरह से नदारद है। इस बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा की लहर पैदा कर दी है। याद रहे कि लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री काल में बिहार में अपराध चरम पर था, जिससे आम जनता को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी।
बिहार में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है ‘जंगलराज’
‘जंगलराज’ बिहार का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा रहा है, जिसके लिए अक्सर लालू यादव को जिम्मेदार ठहराया जाता है। अब सवाल उठता है कि क्या यह मुद्दा नीतीश कुमार के राजनीतिक हथियार से निकल गया है।
दरअसल, हाल के समय में बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने राजनीति पर स्पष्ट प्रभाव डाला है। पारस अस्पताल में सजायाफ्ता गैंगस्टर की इलाज के दौरान हत्या ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़ा कर दिया है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “पुलिस का इकबाल “क्षय”, अधिकारी बने “रंक” गुंडे बने “विजय” व अपराधी बने “सम्राट” अस्पताल में घुसकर बेखौफ अपराधियों में गोली मारी।” अब देखना होगा कि क्या चुनावी माहौल में ‘जंगलराज’ का मुद्दा फिर से नीतीश कुमार के राजनीतिक तरकश में वापिस आएगा या नहीं। फिलहाल, यह विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार बन चुका है।





