नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य से जुड़े एक विवाद ने सियासत को गर्म कर दिया है। टीवी डिबेट में एक वरिष्ठ पत्रकार द्वारा रोहिणी पर की गई टिप्पणी के बाद अब विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष के नेता भी उनके समर्थन में उतर आए हैं। एक वरिष्ठ पत्रकार ने डिबेट के दौरान कहा था कि “रोहिणी आचार्य को मायके में कुंडली मारकर नहीं बैठना चाहिए । इस टिप्पणी पर रोहिणी ने सीधे पत्रकार को फोन कर आपत्ति जताई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। यही वीडियो अब विवाद का केंद्र बन गया है।
चिराग पासवान गुट के सांसद बोले-बेटी का मायके पर पूरा अधिकार
एलजेपी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने X पर लिखा बेटी ससुराल में रहेगी या मायके में, यह उसका और उसके परिवार का विषय है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बेटी के मायके और पैतृक संपत्ति पर अधिकार तय किए हैं, इसलिए किसी पत्रकार को ऐसी सलाह देने का हक नहीं। उन्होंने पत्रकार पर दकियानूसी सोच का आरोप लगाया और रोहिणी का खुलकर समर्थन किया।
BJP नेता निखिल आनंद का भी कड़ा हमला
बीजेपी ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. निखिल आनंद ने भी पत्रकार की टिप्पणी को अत्यंत घटिया और बदतमीजी भरी बताया। उन्होंने लिखा, बेटी किडनी दे सकती है, तो अपने मां-बाप के घर में हिस्सा भी ले सकती है.” पत्रकारों का काम मुद्दों पर सवाल करना है, किसी महिला को परिवार में कैसे रहना चाहिए, यह बताना नहीं। रोहिणी के भाई तेज प्रताप यादव शुरू से ही उनके साथ हैं और पत्रकार पर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
क्यों महत्व रखता है रोहिणी का यह मुद्दा?
रोहिणी अपने पिता लालू यादव को किडनी दान कर सुर्खियों में रही हैं RJD परिवार में उनकी मजबूत राजनीतिक भूमिका देखी जा रही है विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के बयान इसे बड़ा राजनीतिक एंगल दे रहे हैं सियासत जारी, अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर इस मामले ने महिलाओं के अधिकार, पत्रकारिता की मर्यादा और निजी जीवन की आजादी पर बहस छेड़ दी है। अब सवाल है कि इस विवाद का राजनीतिक असर कहाँ तक जाएगा।





