नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक नई राजनीतिक हलचल ने सबका ध्यान खींचा है। उत्तर प्रदेश के भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी आज़ाद समाज पार्टी ने ऐलान किया है कि वह बिहार चुनाव में 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। इस घोषणा के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है, खासकर महागठबंधन के लिए ये चुनौती बन सकती है।
100 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी, 60 पर प्रभारी घोषित
पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए आज़ाद समाज पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जौहर आज़ाद ने बताया कि पार्टी की तैयारी ज़ोरों पर है। 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान इनमें से 60 सीटों पर प्रभारी घोषित बाकी 40 पर तैयारी अंतिम चरण में है
46 सीटों पर महागठबंधन को सीधी चुनौती
पार्टी का दावा है कि जिन सीटों पर वह चुनाव लड़ेगी, उनमें से 46 सीटों पर सीधा मुकाबला महागठबंधन से होगा। जौहर आज़ाद ने महागठबंधन पर आरोप लगाया कि वह सभी वर्गों को साथ लेकर नहीं चल रहा, जिससे जनता में नाराज़गी है। पार्टी ने घोषणा की है कि 21 जुलाई को पटना में राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। इस दौरान पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद खुद मौजूद रहेंगे और बिहार चुनाव को लेकर रणनीति को अंतिम रूप देंगे। लोजपा का जवाब,”कोई असर नहीं पड़ेगा चंद्रशेखर की चुनावी एंट्री पर लोजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता शशि भूषण प्रसाद ने कहा: “लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का हक है, लेकिन इससे हमारी पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दलित समाज चिराग पासवान के साथ है और चिराग ही दलितों के असली नेता हैं।”
एनडीए को कोई सीधा नुकसान नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, आज़ाद समाज पार्टी की एंट्री से खासतौर पर महागठबंधन को नुकसान हो सकता है। पार्टी रविदास समाज को साधने की कोशिश करेगी ये वोट बैंक अब तक मायावती और भाकपा (माले) के साथ रहा है अगर चंद्रशेखर इन वोटरों का छोटा हिस्सा भी तोड़ने में सफल रहे, तो आरजेडी को नुकसान संभव है अगर चंद्रशेखर की पार्टी सिर्फ 500-1000 वोट भी काटती है, तो कई सीटों पर हार-जीत का फर्क तय हो सकता है। विशेषज्ञों की राय है कि चंद्रशेखर की पार्टी एनडीए को प्रभावित नहीं करेगी, क्योंकि पासवान वोटर एनडीए के साथ हैं रविदास वोटर का झुकाव महागठबंधन की ओर ज्यादा रहा है चिराग पासवान का प्रभाव अभी भी दलित समाज में मजबूत बना हुआ है बिहार चुनाव 2025 में चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी की एंट्री ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। जहां एक तरफ पार्टी दलित वोट बैंक पर दांव लगा रही है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन की चिंताएं बढ़ रही हैं।




