नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सियासी हलचलें तेज हो रही हैं। इस बीच लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे इस बार महुआ विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे।
तेजस्वी यादव का चौंकाने वाला रिएक्शन
जब पत्रकारों ने तेजस्वी यादव से इस पर सवाल पूछा कि तेज प्रताप ने महुआ से चुनाव लड़ने की घोषणा की है, तो तेजस्वी ने चौंकाने वाला जवाब दिया। उन्होंने बस इतना कहा:”कितनी पार्टी बनती है…”यह कहकर वे वहां से चले गए। तेजस्वी का यह छोटा लेकिन तीखा जवाब यह दिखाता है कि शायद उन्हें तेज प्रताप के इस फैसले से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, या फिर वे इस पर खुलकर बात नहीं करना चाहते।
तेज प्रताप का कहना- ‘भाई को ही बनाना है CM’
तेज प्रताप ने आरजेडी से दूरी बना ली है और अब वे निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं, लेकिन वे बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि उनका सपना तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनते देखना है। तेज प्रताप ने अपनी चुनावी तैयारी भी शुरू कर दी है। वे लगातार बिहार के अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं कर रहे हैं। हाल ही में वे मुजफ्फरपुर के बोचहां विधानसभा के बोरवारा इलाके में जन संवाद कार्यक्रम में पहुंचे, जहाँ उन्होंने हजारों लोगों को संबोधित किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: अब राज्य में सामाजिक न्याय, सामाजिक हक और सम्पूर्ण बदलाव को मजबूत करना है।
क्यों महुआ से ही लड़ना चाहते हैं तेज प्रताप?
तेज प्रताप फिलहाल हसनपुर से विधायक हैं, लेकिन अब उन्होंने महुआ से लड़ने की बात कही है। महुआ सीट आरजेडी के खाते में आती है, और यहां से मुकेश रोशन मौजूदा विधायक हैं। तेज प्रताप यहां से 2015 में आरजेडी के टिकट पर जीत चुके हैं, और अब एक बार फिर उसी सीट से अपनी सियासी किस्मत आज़माना चाहते हैं – इस बार बिना पार्टी के सहारे। तेज प्रताप का यह फैसला न सिर्फ आरजेडी के लिए सिरदर्द बन सकता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। एक तरफ जहां वे अपने भाई को सीएम बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर वे पार्टी के खिलाफ खड़े भी हो रहे हैं। तेज प्रताप यादव का महुआ से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान और तेजस्वी यादव का उस पर तीखा लेकिन छोटा जवाब आने वाले चुनावों में भाई-भाई की सियासत को और दिलचस्प बना सकता है। जनता के बीच यह देखना भी अहम होगा कि तेज प्रताप को कितनी जनसमर्थन मिलती है और क्या वे बगैर पार्टी के चुनाव जीत पाने में सफल हो पाते हैं।




