नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी समीकरण हर दिन बदल रहे हैं। इसी बीच एक बड़ा मोड़ तब आया जब हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अचानक बिहार चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। पहले महागठबंधन का हिस्सा बनने की कोशिश, फिर अकेले मैदान में उतरने का ऐलान और अब चुनाव से पूरी तरह दूरी, यह पूरा घटनाक्रम कई सवाल खड़े कर रहा है। चलिए जानते हैं कि उनके इस फैसले के लिए आखिर क्या वजह रही होगी?
JMM ने की अपनी नाराजगी जाहिर
बिहार चुनाव से हटने के बाद JMM ने अब खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। झारखंड के पर्यटन मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार ने इसके लिए सीधे तौर पर राजद और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। सुदिव्य कुमार ने कहा कि बिहार में जेएमएम को नजरअंदाज किया गया और गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया गया। उन्होंने इसे एक सियासी साजिश बताते हुए कहा कि पार्टी ने मजबूरी में चुनाव से कदम पीछे खींचने का फैसला लिया। उन्होंने साफ किया कि झामुमो इस पूरे घटनाक्रम को चुपचाप नहीं लेगा और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगा। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए कि पार्टी अब झारखंड में भी राजद और कांग्रेस के साथ अपने रिश्तों का पुनर्मूल्यांकन करेगी। गौरतलब है कि झारखंड में फिलहाल JMM, कांग्रेस और RJD मिलकर इंडिया गठबंधन सरकार चला रहे हैं, लेकिन बिहार के इस विवाद के बाद अब झारखंड की राजनीति में भी नई हलचल के आसार हैं।
सीट बंटवारे से नाराज JMM
JMM ने अब साफ कर दिया है कि वह न तो कोई उम्मीदवार उतारेगा और न ही महागठबंधन के किसी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करेगा। मंत्री सुदिव्य कुमार ने खुलासा किया कि सीट बंटवारे के दौरान कांग्रेस और राजद ने झामुमो के साथ गलत व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय तक बातचीत में उलझी रही, लेकिन जब सम्मानजनक समझौता नहीं हुआ तो बिहार में चुनाव से हटने का फैसला लेना पड़ा। सुदिव्य कुमार ने यह भी कहा कि झामुमो ने पहले भी गठबंधन धर्म निभाते हुए अपनी कुछ पुरानी और मजबूत सीटें कांग्रेस-राजद के लिए छोड़ी थीं। हेमंत सोरेन की सरकार में राजद को मंत्री पद और सीटों में हिस्सेदारी दी गई थी, लेकिन बिहार में झामुमो के साथ किया गया व्यवहार सहिष्णुता की सीमा से बाहर चला गया।
JMM की कांग्रेस पर तीखी टिप्पणी
सुदिव्य कुमार ने कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन की प्रमुख पार्टी होने के बावजूद झामुमो को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, न ही उसने राजद और झामुमो के बीच मध्यस्थता की कोई ठोस कोशिश की। सुदिव्य कुमार ने कहा कि कांग्रेस और राजद दोनों ने मिलकर झामुमो के साथ राजनीतिक छलावा किया, जिससे गठबंधन में गहरी दरार आ गई। उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार में गठबंधन धर्म तोड़ने की यह राजनीति झारखंड की राजनीति पर भी असर डालेगी। उन्होंने कहा कि झामुमो ने बिहार चुनाव से अलग होकर अपने असंतोष और नाराजगी का संकेत साफ दे दिया है और अब पार्टी आने वाले समय में अपने राजनीतिक फैसले खुद तय करेगी।





