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Tuesday, March 3, 2026
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बिहार चुनाव 2025: तीन नेताओं से उलट सकते हैं सियासी समीकरण! NDA और महागठबंधन में खलबली

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर, तेज प्रताप यादव और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता तीसरी ताकत बनकर उभर रहे हैं, जो NDA और महागठबंधन दोनों के समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 6 और 11 नवंबर को मतदान होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे सामने आएंगे। चुनावी मैदान में एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने हैं, लेकिन इस बार मुकाबला इतना सीधा नहीं है। तीन ऐसे नेता हैं जो दोनों खेमों की गणित को उलट-पलट सकते हैं। ये हैं — प्रशांत किशोर, तेज प्रताप यादव, और असदुद्दीन ओवैसी। इन तीनों की रणनीति ने चुनावी फिजा में नया सस्पेंस घोल दिया है।

प्रशांत किशोर: पूरे बिहार में खेला करने की तैयारी

जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके प्रशांत किशोर इस बार खुद मैदान में हैं। पीके ने एलान किया है कि उनकी पार्टी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उनका निशाना किसी एक दल पर नहीं, बल्कि एनडीए और महागठबंधन दोनों पर है। जन सुराज की आक्रामक अभियान शैली गांव-गांव तक पहुंच रही है। माना जा रहा है कि पीके का अभियान युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों को आकर्षित कर रहा है। इससे दोनों प्रमुख गठबंधनों की चिंता बढ़ गई है।

तेज प्रताप यादव: भाई के सामने अब ‘बागी’ चुनौती

राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव इस बार अपने ही परिवार के खिलाफ ताल ठोंक रहे हैं। उन्होंने ‘जनशक्ति जनता दल’ के नाम से अलग पार्टी बनाकर मैदान में उतरने का एलान किया है। तेज प्रताप तेजस्वी यादव, लालू यादव और यहां तक कि राहुल गांधी पर भी सीधा हमला बोल चुके हैं। बड़ा सवाल यह है कि तेज प्रताप यादव वोट बैंक में सेंध लगा पाएंगे या नहीं। अगर यादव वोटों में बिखराव हुआ, तो इसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है।

ओवैसी का सीमांचल प्लान: मुस्लिम वोटों में सेंध की तैयारी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर सीमांचल की 24 सीटों पर फोकस किए हुए हैं। पिछली बार यानी 2020 के चुनाव में ओवैसी ने 14 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीटें जीती थीं, जिससे महागठबंधन को करारी चोट लगी थी। इस बार AIMIM पूरे दमखम से प्रचार में जुटी है। सीमांचल के चार जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत 30% से अधिक है और यहीं से ओवैसी को बड़ी उम्मीदें हैं।

महागठबंधन के रणनीतिकारों को डर है कि अगर मुस्लिम वोट फिर बंटा, तो सीमांचल में एनडीए को बढ़त मिल सकती है। वहीं ओवैसी का दावा है कि वे सीमांचल की जनता की सच्ची आवाज हैं।

असर क्या पड़ेगा?

बिहार का चुनाव इस बार तीन ध्रुवीय हो सकता है। जहां एक ओर एनडीए और महागठबंधन आमने-सामने हैं, वहीं प्रशांत किशोर, तेज प्रताप और ओवैसी जैसे नेता किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। ये तीनों नेता किसी गठबंधन का खेल बिगाड़ सकते हैं, या खुद किसी समीकरण का हिस्सा बन सकते हैं। अब देखना यह होगा कि बिहार की जनता किसे सिर माथे बिठाती है, और कौन बनता है इस बार सत्ता का असली भागीदार।

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