नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद आरजेडी की पहली समीक्षा बैठक सोमवार 17 नवंबर को पटना में हुई। बैठक में सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को दोबारा विधायक दल का नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया। इस बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। लेकिन बैठक के बाद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह का बयान सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
हर EVM में पहले से 25 हजार वोट पड़े थे- जगदानंद सिंह का आरोप
मीडिया से बात करते हुए जगदानंद सिंह ने दावा किया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। उनका कहना है कि हर ईवीएम में करीब 25 हजार वोट पहले से कैद थे, फिर भी हमारे 25 विधायक जीत गए, यह सौभाग्य की बात है।” उन्होंने कहा कि इस तरह का चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों पर चोट है और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़ा होता है।
“सत्ता पक्ष ने किए खास उपाय, लोकतंत्र खतरे में”
जगदानंद ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव परिणाम बदलने के लिए सत्ता पक्ष की ओर से विशेष उपाय किए गए। उन्होंने कहा, अगर लोकतंत्र की प्रक्रिया में ही छेड़छाड़ होने लगे, तो देश किस दिशा में जाएगा? क्या चुनाव भी व्यापार बन गया है। उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए ईवीएम की जांच की मांग भी उठाई।
”हम बैलेट पेपर पर जीतते हैं, EVM पर हारते हैं”
आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा ,“ईवीएम में चोरी हुई है। बैलेट पेपर वाले चुनाव में हम जीतते हैं, लेकिन ईवीएम वाले चुनाव में हार होते हैं। वे बोले कि पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में इस लड़ाई को जारी रखेगी।
बहस फिर गर्म, आगे क्या होगी रणनीति?
आरजेडी नेताओं के इन आरोपों से एक बार फिर ईवीएम पर राष्ट्रीय स्तर की बहस तेज हो गई है। चुनाव आयोग कई बार कह चुका है कि EVM पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन आरजेडी चुनाव में तकनीकी गड़बड़ी की जांच की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए बैलेट पेपर की वापसी पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकता है।





