नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज है। इस बीच एनडीए के वरिष्ठ नेता और हरनौत से विधायक हरिनारायण सिंह का टिकट कट गया है। यदि वे इस बार भी जीतते, तो यह उनकी लगातार 10वीं विजय होती। टिकट कटने से उनका यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनने से चूक गया।
बिहार विधानसभा में ‘क्लब 9’ की दौड़ में ये नेता
बिहार की राजनीति में अब तक कोई भी नेता 10 बार विधानसभा चुनाव नहीं जीत सका है। फिलहाल भाजपा के प्रेम कुमार और जदयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव ऐसे दो मौजूदा विधायक हैं, जो लगातार 8 बार चुनाव जीत चुके हैं। दोनों ने इस बार भी दावेदारी पेश कर दी है। अगर वे जीतते हैं, तो ‘क्लब 9’ में शामिल होकर इतिहास रचेंगे।
बिहार में 10 बार जीत का रिकॉर्ड अब भी अधूरा
बिहार में अब तक नौ बार विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड सिर्फ तीन नेताओं- सदानंद सिंह, रमई राम और हरिनारायण सिंहके नाम है। सदानंद सिंह और रमई राम के निधन के बाद उम्मीद थी कि जदयू नेता हरिनारायण सिंह 10वीं बार जीतकर नया इतिहास रचेंगे। लेकिन इस बार जदयू ने उनका टिकट काट दिया, जिससे उनका सपना अधूरा रह गया और बिहार में 10 बार चुनाव जीतने वाला रिकॉर्ड अब भी किसी के नाम नहीं है।
नौवीं जीत से एक कदम दूर
बिहार विधानसभा चुनाव में दो दिग्गज नेता- योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार अब रिकॉर्ड की दहलीज पर हैं। दोनों आठ बार विधायक रह चुके हैं और इस बार भी अपनी-अपनी सीट से मैदान में हैं। बिजेंद्र यादव सुपौल से, जबकि प्रेम कुमार 1990 से गया से लगातार जीतते आ रहे हैं। अगर वे इस बार भी जीतते हैं, तो वे बिहार के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने विधानसभा चुनाव में नौ बार जीत दर्ज की है।
जीतन राम मांझी भी आठ बार जीत चुके हैं चुनाव
केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी अब तक आठ बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने 1980 से 2020 के बीच आठ बार जीत दर्ज की और 2024 में लोकसभा चुनाव जीतकर केंद्र में मंत्री बने। वहीं, सुरेंद्र प्रसाद यादव ने भी 2020 में आठवीं बार विधानसभा पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, वे 2004 में लोकसभा चुनाव भी जीत चुके हैं और फिलहाल सांसद हैं। ऐसे में दोनों दिग्गज नेता इस बार विधानसभा चुनाव की दौड़ में शामिल नहीं हैं।
अब्दुल बारी सिद्दीकी और श्रवण कुमार के पास आठवीं जीत का मौका
बिहार की राजनीति के तीन दिग्गज- भाजपा के नंदकिशोर यादव, राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी और जदयू के श्रवण कुमार। अब तक सात-सात बार विधानसभा पहुंच चुके हैं। इस बार नंदकिशोर यादव को टिकट नहीं मिला है, जिससे वे चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं। वहीं, सिद्दीकी और श्रवण कुमार अब भी सक्रिय राजनीति में हैं। यदि वे इस बार भी जीतते हैं, तो यह उनकी आठवीं विधानसभा जीत होगी। सिद्दीकी ने पहली बार 1977 में और श्रवण कुमार ने 1995 में चुनावी सफर शुरू किया था और तब से लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।
विजय चौधरी सातवीं जीत का कर रहे हैं प्रयास
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई अनुभवी नेता फिर से किस्मत आजमा रहे हैं। संसदीय व जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी 1982 से अब तक छह बार विधायक रह चुके हैं। कांग्रेस के विजय शंकर दूबे और अवधेश कुमार सिंह भी छह-छह बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं। इस बार करीब आधा दर्जन ऐसे दिग्गज नेता चुनावी मैदान में हैं, जो छह से अधिक बार जीतकर सदन की सदस्यता ले चुके हैं, और अब अपने अनुभव के बूते फिर से जीत का दावा ठोक रहे हैं।





