नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सियासी दल अपने-अपने दांव खेल रहे हैं। NDA ने अति पिछड़ा वर्ग EBC के वोट बैंक को साधने के लिए नई रणनीति बनाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में सम्राट जरासंध की प्रतिमा का अनावरण किया, तो वहीं BJP ने पटना में अति पिछड़ा वर्ग हुंकार सम्मेलन आयोजित कर दिया। इन दोनों कदमों का मकसद एक ही है—अति पिछड़ा वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करना।
15 करोड़ रुपये से बनी जरासंध की मूर्ति
राजगीर में रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मगध सम्राट जरासंध की विशाल प्रतिमा का अनावरण किया। इस मूर्ति की ऊंचाई 21 फीट है और इसे बनाने में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह मूर्ति पीतल से बनी है और इसे 11 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया गया है। सरकार का कहना है कि यह मूर्ति एक ऐतिहासिक पुरुष को सम्मान देने के लिए बनाई गई है। लेकिन राजनीतिक जानकार इसे चुनावी रणनीति मान रहे हैं। खासतौर पर, इसे कहार जाति के मतदाताओं को साधने की कोशिश बताया जा रहा है। जातिगत जनगणना के अनुसार, बिहार में कहार जाति की आबादी करीब 21 लाख है, जो अति पिछड़ा वर्ग में एक अहम स्थान रखती है। इसीलिए, इस कार्यक्रम में BJP के कहार नेता और मंत्री प्रेम कुमार भी शामिल हुए।
BJP का अति पिछड़ा वर्ग हुंकार सम्मेलन
इसी दिन पटना में BJP ने अति पिछड़ा वर्ग हुंकार सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में BJP के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने विपक्ष पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हमेशा आरक्षण का लाभ केवल अपने परिवार तक सीमित रखा है। उन्होंने दावा किया कि NDA ही असली मायने में गरीबों और पिछड़ों की चिंता करती है। उन्होंने NDA सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि बिहार में जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का निर्णय और जरासंध की मूर्ति का अनावरण अति पिछड़ा वर्ग को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
बिहार में 36% अति पिछड़ा वोटर निर्णायक
जातिगत जनगणना के अनुसार, बिहार में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) की आबादी 36% है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की 27% है। इसके अलावा अनुसूचित जाति (SC) की आबादी लगभग 20%, अनुसूचित जनजाति (ST) की 2% और सामान्य जातियों की 15% है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अति पिछड़ा वर्ग चुनावी समीकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, कहार जाति के लोग चंद्रवंशी और रवानी नाम से भी जाने जाते हैं। इस अध्ययन में बिहार में कहार जाति की आबादी 30 लाख से अधिक बताई गई थी। यह जाति बिहार के सभी 38 जिलों में मौजूद है, लेकिन गया जिले में इसकी आबादी सबसे अधिक पाई गई है। BJP और JDU के इन कदमों से RJD नेता तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि अति पिछड़ा वर्ग बिहार में एक बड़ा वोट बैंक है, इसलिए NDA इस वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है। वहीं, RJD ने अब तक इस वर्ग को लुभाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बिहार की राजनीति में इस जातिगत समीकरण का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। अब देखना होगा कि विपक्ष इस रणनीति का जवाब कैसे देता है और चुनावी जंग में कौन बाजी मारता है।





