नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । गायघाट विधानसभा क्षेत्र बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और यह सीट विधानसभा क्षेत्र संख्या 88 के रूप में जानी जाती है। यह सामान्य श्रेणी की सीट है, यानी यहां पर अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कोई आरक्षण नहीं है। यह क्षेत्र मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और राजनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम माना जाता है।
बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल यूनाइटेड (JDU), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस प्रमुख खिलाड़ी हैं। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद के निरंजन रॉय ने जदयू के महेश्वर यादव को 7,566 वोटों से हराकर यह सीट अपने नाम की थी। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राज भूषण चौधरी ने कांग्रेस के अजय निषाद को भारी अंतर 2,34,927 वोटों से हराकर मुजफ्फरपुर सीट पर जीत दर्ज की। अब 2025 के विधानसभा चुनाव में सवाल यह है कि क्या राजद अपना कब्जा बरकरार रख पाएगा या फिर भाजपा-जदयू गठबंधन यहां कोई नया समीकरण रचेगा? जातीय गणित, पिछले नतीजे और मौजूदा राजनीतिक हवा सब मिलकर इस सीट को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं।
गायघाट निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं का आंकड़ा
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों में गायघाट विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,16,108 मतदाता थे। इनमें से 1,66,475 पुरुष, 1,49,627 महिलाएं और 6 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे। इस दौरान 506 डाक मत डाले गए, जबकि सेवा मतदाताओं की संख्या 350 रही, जिनमें 333 पुरुष और 17 महिला मतदाता थे। वहीं, 2015 के विधानसभा चुनाव में गायघाट में कुल 2,87,372 मतदाता दर्ज किए गए थे। इनमें 1,53,220 पुरुष, 1,34,149 महिला और 3 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल थे। उस वर्ष 783 वैध डाक मत डाले गए थे और सेवा मतदाताओं की संख्या 578 थी, जिनमें 532 पुरुष और 46 महिला शामिल थीं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पांच वर्षों में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जो क्षेत्र की जनसांख्यिकी में हो रहे बदलावों को दर्शाती है।
गायघाट विधानसभा चुनाव : 2020 और 2015 के नतीजे
विधानसभा चुनाव 2020 में राजद के निरंजन रॉय ने जदयू के महेश्वर यादव को हराकर गायघाट सीट पर जीत दर्ज की थी। निरंजन रॉय को 59,778 वोट मिले, जबकि महेश्वर यादव को 52,212 वोट प्राप्त हुए। लोजपा की कोमल सिंह ने 36,851 वोट हासिल किए और 20.29% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं, विधानसभा चुनाव 2015 में इस सीट से राजद के महेश्वर यादव विजयी रहे थे। उन्हें 67,313 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की वीणा देवी को 63,812 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहीं। उस चुनाव में जीत का अंतर सिर्फ 3,501 वोट यानी 2.14% था।
गायघाट सीट के पूर्व विजेताओं पर एक नजर
गायघाट विधानसभा सीट पर वर्षों से कई दलों और नेताओं का दबदबा रहा है। 2010 में यह सीट भाजपा की वीणा देवी ने जीती थी। 2005 में दोनों बार (फरवरी और अक्टूबर) राजद के महेश्वर प्रसाद यादव विजयी रहे। इससे पहले 2000 में जेडीयू के वीरेंद्र कुमार सिंह, 1995 में जनता दल से महेश्वर प्रसाद यादव, और 1990 में वे ही निर्दलीय रूप में विजेता बने थे। 1985 में यह सीट कांग्रेस के वीरेंद्र कुमार सिंह ने जीती थी, जबकि 1980 में भाजपा के जीतेन्द्र प्रसाद सिंह और 1977 में जनता पार्टी के विनोदानंद सिंह ने जीत हासिल की थी। यह इतिहास दर्शाता है कि गायघाट सीट पर कई बार राजनीतिक उलटफेर हुए हैं और यह क्षेत्र हमेशा से चुनावी दृष्टि से अहम रहा है।




