नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव के चलते सियासी तापमान तेज होता जा रहा है। इसी बीच दरभंगा में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मंच से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग विवाद की जड़ बन गया है। इस घटना पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है जहां उन्होनें कांग्रेस की ‘घृणा की राजनीति’ को देश के लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। अमित शाह ने साफ कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी को जितनी भी गालियां दी जाएंगी, उतना ही भाजपा मजबूत होगी और उसका ‘कमल’ खिलता रहेगा।
राहुल गांधी के मंच से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपशब्दों का मामला
दरभंगा में राहुल गांधी की ‘घुसपैठिए बचाओ यात्रा’ के दौरान लगाए गए मंच से प्रधानमंत्री मोदी की स्वर्गीय माता के लिए आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। अमित शाह ने इस घटना को कांग्रेस के ‘सबसे घृणित’ और ‘नकारात्मक’ राजनीतिक कदम के रूप में करार दिया है।
असम के गुवाहाटी में नये राजभवन के उद्घाटन समारोह के दौरान अमित शाह ने कहा, “राहुल गांधी ने भारतीय राजनीति में घृणा और तिरस्कार की राजनीति की शुरुआत की है, और इसका हालिया उदाहरण उनकी घुसपैठिए बचाओ यात्रा में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि मंच से प्रधानमंत्री मोदी की माता के खिलाफ अपशब्द बोलना पूरी कांग्रेस की सियासी नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति पर हमला
अमित शाह ने कहा, कांग्रेस के हर बड़े नेता सोनिया गांधी, मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, रेणुका चौधरी ने मोदी के खिलाफ कभी न खत्म होने वाली गालियों का प्रयोग किया है। कोई मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहता है, तो कोई ‘जहरीला सांप’, ‘नीच आदमी’, ‘रावण’ और ‘भस्मासुर’ तक कह चुका है। फिर भी वे सोचते हैं कि इस भाषा से उन्हें जनादेश मिलेगा। शाह ने कांग्रेस की इस प्रकार की ‘मुद्दाविहीन विरोध’ और ‘घृणा की राजनीति’ को देश की प्रगति और लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति हमारे सार्वजनिक जीवन को ऊंचाई पर नहीं पहुंचाएगी, बल्कि गर्त में ले जाएगी।
भाजपा के लिए टर्निंग पॉइंट
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इन अपशब्दों का मोदी की लोकप्रियता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना था, प्रधानमंत्री मोदी को जितनी भी गालियां दी जाएंगी, उतना ही भाजपा का ‘कमल’ खिलेगा और पार्टी और अधिक मजबूत होगी। यह भाजपा के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस पूरे घटनाक्रम की निंदा की और कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अशोभनीय भाषा और अभद्रता को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि वे इस तरह की अपमानजनक भाषा को किसी भी हालत में बर्दाश्त न करें।
राहुल गांधी से माफी की मांग
अमित शाह ने राहुल गांधी से भी कड़ा आग्रह किया कि वे इस घटना के लिए तत्काल माफी मांगें। उन्होंने कहा, “अगर उनमें जरा भी शर्म बची है तो वे प्रधानमंत्री मोदी, उनकी स्वर्गीय माता और देश की जनता से माफी मांगें। प्रधानमंत्री मोदी का जीवन संघर्ष और उनकी मां की संस्कारित जीवनशैली को अपशब्दों से बताना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अस्वीकार्य है।”
चुनावी राजनीति में नया मोड़
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सियासी दलों के बीच जारी संघर्ष को और तेज करेगा। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाकर अपने पक्ष में मोड़ने की पूरी कोशिश कर रही है। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए भाजपा इसे पार्टी की नैतिक और राजनीतिक श्रेष्ठता साबित करने का अवसर मान रही है। बिहार की जनता भी इस विवाद से काफी प्रभावित दिख रही है। अब यह देखना बाकी है कि इस बयानबाजी का चुनावी रण में क्या असर पड़ता है और बिहार की सियासी तस्वीर कैसे बदलती है।




