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Vastu Tips : जानिए वास्तु के हिसाब से क्या है तुलसी के पत्ते तोड़ने के नियम

Vastu Upay : वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है।

नई दिल्ली , 13 सितम्बर 2023 : हिंदू धर्म तुलसी के पौधे को बहुत पूजनीय और पवित्र माना गया है। तुलसी का पौधा लगभग हर घर के आंगन में देखने को मिलता है। कहा जाता है कि नियमित रूप से तुलसी की पूजा करने से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा तो तुलसी अर्पित किए बिना अधूरी होती है। वास्तु और ज्योतिष में भी तुलसी को बेहद शुभ पौधा माना गया है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी का पौधा पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक होता है। वास्तु की मानें तो इस पौधे को घर में लगाने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है साथ ही सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। लेकिन कई बार लोग अनजाने में तुलसी की पत्ते तोड़ते समय कुछ गलतियां कर देते हैं जिसकी वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुराणों में तुलसी की पत्तियों को लेकर कुछ नियम भी बताए गए हैं। तो चलिए जानते हैं।  

जानें क्या है तुलसी के पत्ते तोड़ने के नियम – 

  1. कहा जाता है कि कभी भी तुलसी की पत्तियों को नाखून के द्वारा नहीं तोड़ना चाहिए। इसे बहुत अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। इसलिए तुलसी के पत्ते तोड़ते समय हमेशा उंगलियों का ही इस्तेमाल करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि हाथ मारकर या लकड़ी के प्रयोग से भी इसके पत्ते न तोड़ें। 

  2. वास्तु के अनुसार, जब किसी की मृत्यु हो जाए तो उस दिन से लेकर तेरहवीं तक तुलसी का पत्ता नहीं तोड़ना चाहिए। 

  3. हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का काफी महत्व होता है। इसलिए बिना स्नान किए तुलसी की पत्तियों को नहीं छूना चाहिए। ऐसा करने से जातक पाप का भागी बन सकता है। इसलिए हमेशा स्वच्छ होकर ही पत्तियों को छुएं। 

  4. तुलसी की पत्ते तोड़ने से पहले तुलसी मां का ध्यान करते हुए हाथ जोड़ें और उनसे अनुमति लें। 

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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