Vastu Tips - रसोईघर में वास्तु के अनुसार रखें सामान , भरा - पूरा रहेगा किचन

Vastu tips - रसोई घर का ह्रदय होता है और इसलिए उसकी सही वास्तु व्यवस्था से घर के सभी सदस्यों के आरोग्य और खुशहाली में सुधार होती है।
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नई दिल्ली| 8 अगस्त |रफ़्तार डेस्क वास्तु शास्त्र में किचन को बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। माना जाता है कि किचन का सही होना घर के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए बहुत ही आवश्यक है। वास्तु के अनुसार, किचन में कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें सही दिशा में और सही स्थान पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और परिवार के सदस्यों को लाभ होता है।

किचन की दिशा

वास्तु के अनुसार, किचन का दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय कोण) सबसे अच्छा स्थान है। इस दिशा में अग्नि तत्व का प्रवाह होता है, जो किचन के लिए बहुत ही शुभ है। अगर किचन का निर्माण इस दिशा में नहीं हो सकता है, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी एक अच्छा विकल्प है।

चूल्हा

चूल्हा को हमेशा दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा में अग्नि तत्व का प्रवाह होता है, जो किचन के लिए बहुत ही शुभ है। चूल्हे का मुख हमेशा पूर्व दिशा में होना चाहिए।

सिंक

सिंक को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा में जल तत्व का प्रवाह होता है, जो किचन के लिए बहुत ही शुभ है। सिंक का मुख हमेशा पश्चिम दिशा में होना चाहिए।

रसोई का सामान

रसोई में रखे जाने वाले सामानों को भी वास्तु के अनुसार रखना चाहिए। कुछ सामानों को सही दिशा में रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और परिवार के सदस्यों को लाभ होता है।

  • दाल, चावल, आटा आदि को दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखें।

  • मसाले, तेल, नमक आदि को उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।

  • पानी के बर्तन या जल शोधक को उत्तर-पूर्व दिशा में रखें।

  • खाना पकाने के बर्तन को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें।

  • गैस स्टोव के ऊपर कोई भी भारी सामान न रखें।

  • किचन में झाड़ू न रखें।

  • किचन को हमेशा साफ और सुव्यवस्थित रखें।

वास्तु के अनुसार किचन को सही तरीके से बनाना और रखना घर के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए बहुत ही आवश्यक है। अगर आप वास्तु के अनुसार किचन बनाते हैं और रखते हैं, तो आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कर सकते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को लाभान्वित कर सकते हैं।

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