मुंबई / रफ्तार डेस्क । महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम एक दिन पहले आ गए और फिर एक बार भाजपा नीत महायुति गठबंधन ने निर्णायक जीत दर्ज कर अपनी सत्ता को बरकरार रखा है। दूसरी ओर महा विकास अघाड़ी एनसीपी, उद्धव, कांग्रेस गठबंधन तमाम प्रयासों के बाद भी महाराष्ट्र की जनता का भरोसा जीतने में असफल रहे। हालांकि छह महीने पहले लोकसभा चुनाव में इसी महाविकास अघाड़ी का प्रदर्शन शानदार रहा था, पर वह जादू इस बार के विधानसभा चुनाव में देखने को नहीं मिला । वहीं इस पूरे चुनाव के दौरान जो सबसे ज्यादा ध्यान में बात आई वह है महाराष्ट्र की जनता का भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा करना जोकि अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में सबसे अधिक है। यहां अन्य राजनीतिक पार्टियों की करारी हार का मतलब यह भी है कि राज्य विधानसभा के इतिहास में पहली बार विपक्ष का कोई नेता नहीं होगा। क्योंकि किसी भी विपक्षी दल को सदन की कुल 288 सीटों का 10 प्रतिशत भी समर्थन नहीं मिला है ।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के यदि आंकड़ों पर ही गौर करें तो इस बार के चुनाव में भाजपा 132 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। जबकि इससे पहले उसे 2019 में 105 सीटों पर सफलता मिली थी, इससे भी यदि पीछे जाएं तो वर्ष 2014 में 122 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में वर्तमान प्रदर्शन को देखते ही एक राजनीतिक पार्टी बतौर उसके लिए यही कहना होगा कि यह उसका महाराष्ट्र में सर्वोच्च प्रदर्शन है। वहीं, ध्यान देनेवाली बात यह है कि अन्य पार्टियों के मुकाबले उसका स्ट्राइक रेट सबसे हाई 85 प्रतिशत से अधिक रहा है । दरअसल, यह बड़ी बात इसलिए भी है क्योंकि इस बार के चुनावों में बीजेपी ने कुल 149 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से वह 132 सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही है। दूसरी ओर उसके सहयोगी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 81 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12.38% वोट शेयर के साथ 57 सीटें जीतीं। शिंदे ने अपनी चुनावी रणनीति से यह सुनिश्चित किया कि उद्धव ठाकरे के खिलाफ उनके साथ विद्रोह करने वाले विधायक जीत जाएं, और हुआ भी यही, उद्धव के नेतृत्व वाली सेना ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन सफलता उसे सिर्फ 20 सीटों पर ही मिली।
एनसीपी का वोट शेयर 9.01% रहा
उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने कुल 59 सीटों पर चुनाव लड़कर 41 सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर 9.01% रहा, जबकि शरद पवार की एनसीपी का वोट शेयर 11.28% रहा है, उसने 86 सीटों पर चुनाव लड़ा पर उसे केवल 10 सीटें मिलीं। जहां तक कांग्रेस की बात है, तो उसने लोकसभा चुनाव में 13 सीटें जीती थीं, लेकिन छह महीने के भीतर ही वह अपनी यह बढ़त गंवा बैठी। विधानसभा चुनाव में 101 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद महाराष्ट्र की जनता ने सिर्फ 16 विधानसभा क्षेत्रों में ही उसे स्वीकार किया, कांग्रेस का वोट शेयर कुल 12.42 प्रतिशत रहा है। यदि अन्य पार्टियों की बात की जाए तो समाजवादी पार्टी को यहां से दो सीटों पर जीत मिल सकी है।
विपक्ष पड़ा कमजोर
असुदद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को महाराष्ट्र में सिर्फ एक सीट मालेगांव सेंट्रल सीट पर ही सफलता मिल सकी है। वहीं वहीं, अन्य दस सीटों में कुछ छोटे दल और निर्दलीय शामिल हैं। इस तरह देखें तो भाजपा को ही सबसे अधिक महाराष्ट्र की जनता से पसंद किया है और जितनी सीटें एक दल को अपना नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए विधानसभा में चाहिए, विपक्ष में इस बार के किसी भी संगठन को उतनी सीटें नहीं मिली हैं, ऐसे में इस बार विपक्ष के कमजोर होने का एक मतलब यह भी है कि इस बार यहां राज्य विधानसभा के इतिहास में पहली बार विपक्ष का कोई नेता नहीं होगा। क्योंकि किसी भी विपक्षी दल को सदन की कुल 288 सीटों का 10 प्रतिशत भी समर्थन नहीं मिल सका है ।





