भारत में MeToo मूवमेंट नहीं कर पाया काम, एक्ट्रेस सोमी अली ने बताई हकीकत

Anzar Hashmi

एक्ट्रेस सोमी अली लंबे समय से फिल्मी दुनिया से दूर हैं, लेकिन अब वह महिलाओं के अधिकारों और उनकी आजादी को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती नजर आती हैं।

Somy Ali | Social Media

सोमी अली ह्यूमन ट्रैफिकिंग और घरेलू हिंसा के सर्वाइवर्स के लिए एक एनजीओ भी चलाती हैं। महिलाओं के अधिकारों के लिए हमेशा बोलने वाली सोमी अली ने हाल ही में भारत में मीटू मूवमेंट के फेल होने की वजह का खुलासा किया।

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सोमी अली ने इंटरव्यू में मीटू मूवमेंट के बारे में बात करते हुए तनुश्री दत्ता के केस को याद किया। उन्होंने कहा, ''डायंड्रा (सोरेस), जो एक मॉडल और मेरी अच्छी दोस्त हैं, उन्होंने भी तनुश्री दत्ता के अलावा भारत में मीटू आंदोलन के दौरान खुलकर बात की।

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अमेरिका में लोगों को जेफरी एपस्टीन और बिल कॉस्बी के खिलाफ बोलने में 18 साल लगे थे। ग्वेनेथ पाल्ट्रो और एशले जुड जैसे हॉलीवुड अभिनेताओं को मीटू आंदोलन के दौरान उत्पीड़न का सामना करने के बारे में खुलकर बोलने में काफी समय लग गया।

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आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत और पाकिस्तान में इंसाफ मिलने में कितने साल लगेंगे। अमेरिका में भी तमाम तरह के अपराध होते हैं।''

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एक्ट्रेस से एक्टिविस्ट बनीं सोमी अली ने कहा कि डर और करप्शन के कारण भी जस्टिस प्रभावित होता है। उन्होंने कहा, ''हम सब जानते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत के साथ क्या हुआ, लेकिन कोई सवाल नहीं उठा रहा है। हर कोई यह पूछने से डरता है कि क्या जिया खान की मौत सच में आत्महत्या से हुई थी या यह एक हत्या थी।

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जब तक बॉलीवुड में डर का माहौल रहेगा, तब तक कुछ भी नहीं बदलने वाला।'' उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान में डर अहम भूमिका निभाता है। डर, अपराधबोध, शर्म, फेम, करप्शन कुछ ऐसे पहलू हैं, जो भारत और पाकिस्तान दोनों में ही हैं।

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सोमी अली ने आगे कहा कि महिलाएं अपराधबोध और शर्मिंदगी का शिकार होती है। अगर आदमी के पास फेम है तो वह उसका फायदा उठाना चाहता है। अपने कॉन्टेक्ट्स के जरिये वह लोगों में डर पैदा करता है। सोमी अली का कहना है कि भारत में मीटू पीड़ितों को न्याय दिलाने में अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।

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