नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अफ्रीका में तेजी से फैल रहे Mpox (पूर्व में मंकीपॉक्स) वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक आपात स्थिति की घोषणा की है। कांगो में उत्पन्न हुए इस वायरस की वजह से आसपास के देश भी चिंतित हैं। जिनमें बुरुंडी, रवांडा, केन्या और युगांडा शामिल हैं।
क्या है Mpox?
Mpox वायरस एक वायरल जूनोटिक संक्रामक रोग है। जो Orthopoxvirus जीनस का हिस्सा है। ये वायरस पश्चिम और मध्य अफ्रीका के वन क्षेत्रों में पाया जाता है, लेकिन हाल ही में यह अन्य क्षेत्रों में भी पाया गया है। यह वायरस मुख्यत: जानवरों में पाया जाता है। यह संक्रमित जानवरों के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या घावों के सीधे संपर्क में आने पर यह मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है।
संक्रमण के बाद क्या होता है?
अगर कोई मनुष्य इस वायरस से संक्रमित हो जाता है। तो यह फिर मानव से मानव में फैलना शुरू कर देता है। यह मुख्यत: त्वचा के घावों, सांस, या बिस्तर जैसे दूषित सामग्री के सीधे संपर्क में आने पर मनुष्यों में फैलता है। जब यह वायरस शरीर के अंदर प्रवेश करता है तो आमतौर पर व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। जिसमें बुखार, मांसपेशियों में दर्द या सिरदर्द शामिल हैं। इसके बाद व्यक्ति के शरीर पर दाने-दाने उभर आते हैं। जो आकार में चेचक के दानों से काफी बड़े और कड़े होते हैं।
पहली बार 1970 में हुई थी Mpox की खोज
Mpox का पहला मानव मामला 1970 में कांगो में दर्ज किया गया था। मानव में मिले वायरस को सबसे पहले बंदरों में 1958 में ढूंढा गया था। इसलिए इसका नाम पहले मंकीपॉक्स रखा गया था।
इस साल तक हो चुकी हैं 517 मौतें
साल 2024 में एक बार फिर मानवों में ये वायरस फैल रहा है। इसका क्लेड Ib वैरियेंट कांगो से शुरू होकर आसपास के देशों में फैल गया है। यह वेरिएंट काफी तेजी से एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य में फैल रहा है। mpox वायरस से इस साल अफ्रीका महाद्वीप में 17 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं और 517 मौतें दर्ज की गई है।





