नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के द्वारा इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में भेजी गई भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर अभी भी अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। नासा उन्हें धरती पर लाने की कोशिशें कर रहा है। अब खबर सामने आ रही है कि नासा सुनीता और विल्मोर को धरती पर लाने के लिए नया प्लान बनाया है। ये प्लान नासा ने बोइंग के साथ मिलकर बनाया है। जिसको लेकर बोइंग ने बताया है कि उनके एक्सपर्ट्स ने 1 लाख से ज्यादा कप्यूटर सिमुलेसंस कर इस प्लान को बनाया है। इसमें कोई खराबी नहीं आई है। इसके जरिये हम अंतरिक्ष यात्रियों को धरती पर आसानी से उतार सकते हैं।
बोइंग स्टारलाइनर से स्पेस में गईं थी सुनीता
गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर बोइंग स्टारलाइनर की पहली उड़ान से स्पेस में गए थे और इस समय वो वहीं पर फंसे हुए हैं। कंप्यूटर सिमुलेसंस से पता चला है कि 28 में से 27 रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से फिट हैं। उनमें कोई खराबी नहीं आई है। जिस तरह से उन्हें वहां पर भेजा गया है। ठीक उसी तरह से उन्हें वापस भी लाया जा सकता है।
एयरक्राफ्ट में आई तकनीकी खराबी
बोइंग की स्टारलाइनर एयरक्राफ्ट में आई खराबी को दूर करने के लिए बोइंग ने एक लाख से ज्यादा कंप्यूटर सिमुलेसंस किए हैं। हर लाइनअप की बारीकी से पड़ताल कर जानने कि कोशिश की गई कि जब स्पेस स्टेशन से स्टारलाइनर को अनडॉक किया जाएगा और इसे धरती के वायुमंडल में और फिर महासागर के ऊपर लाया जाएगा तो क्या स्थिति बनेगी।
8 दिनों का मिशन 60 दिनों का हुआ
बोइंग ने बताया कि हमारा सिस्टम फुलप्रूफ है। उम्मीद है कि हम जल्द कामयाब होंगे। बोइंग अभी नासा के साथ मिलकर स्पेसक्राफ्ट के डाटा का विश्लेषण कर रहा है। क्योंकि थ्रस्टर्स में विस्फोट और हीलियम लीक होने की वजह से ही सुनीता स्पेस में फंसी हुई हैं। उस समय ये मिशन सिर्फ 8 दिन का था अब यह मिशन 60 दिनों का हो गया है।
सुनीता विलियम्स और विल्मोर 5 जून को हुए थे रवाना
बोइंग की टेस्ट फ्लाइट से सुनीता विलियम्स और विल्मोर 5 जून को स्पेस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। इस दौरान 28 रिएक्टर थ्रस्टर्स में से 5 रिएक्शन थ्रस्टर्स फेल हो गए। इसकी वजह से दोनों एस्ट्रोनॉट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर ही फंस गए। बताया जाता है कि अगर बोइंग के कैप्सूल से दोनों स्पेस यात्रियों को धरती पर उतारने की योजना सफल हो जाती है तो अंतरिक्ष की दुनिया में क्रांति आ जाएगी। क्योंकि एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में भेजने का काफी आसान और टिकाउ रास्ता मिल जाएगा।
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