नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । कनाडा में भारतीयों को लगातार परेशान किया जा रहा है । तीन भारतीय छात्रों की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर कनाडा सरकार भी भारतीय छात्रों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, कनाडा में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को अब एक नई टेंशन है। रिपोर्ट के मुताबिक उनसे कई तरह के दस्तावेजों की मांग की जा रही है। छात्रों से ईमेल के जरिए स्टडी परमिट, वीजा, एकेडमिक रिकॉर्ड, मार्कर और अटेंडेंस मांगी गई है।
कनाडा के आव्रजन, शरणार्थी और नागरिकता कनाडा (आईआरसीसी) विभाग के इस कदम से विदेशी छात्र डरे हुए हैं। कई छात्र तो ऐसे हैं जिनके पास सिर्फ दो साल का ही वीजा है। कनाडा ने विदेशी छात्रों को लेकर अपने नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। मामले को लेकर एक छात्र ने बताया, जब मुझे ईमेल मिला तो मैं हैरान रह गया। मेरा वीज़ा केवल मई 2026 तक है। मुझसे सभी दस्तावेज जमा करने को कहा गया है। मेरी उपस्थिति, अंक और अंशकालिक कार्य रिकॉर्ड भी मांगा गया था, पिछले सप्ताह पंजाब के छात्रों को भी ऐसे ईमेल मिले थे और सत्यापन के लिए आईआरसीसी कार्यालय जाने के लिए कहा गया था।
दूसरी तरफ तीन भारतीय छात्रों की हत्या को लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि यह एक भयानक त्रासदी है। भारतीय उच्चायोग इस मामले की गहन जांच की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है, इसे लेकर भारतीय मिशन अधिकारियों के संपर्क में है।
गौरतलब है कि भारत और कनाडा के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले साल जस्टिन ट्रूडो ने नीर की हत्या के लिए बरात पर बेबुनियाद आरोप लगाए थे। इसके बाद भारत ने ओटावा से अपने उच्चायुक्त को वापस बुला लिया था। फिर कनाडा ने भी अपने अधिकारियों को वापस बुला लिया। दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता ही गया । एक तरफ भारत ने कहा कि कनाडा ठोस सबूत दे, दूसरी ओर, कनाडा बेबुनियाद आरोप लगाता रहा और भारत को सबूत नहीं सौंप सका। जस्टिन ट्रूडो की सरकार में खालिस्तानियों का हौसला बुलंद है । ऐसे में भारतीय मिशन को कई झटके लगे। कनाडा में भारतीय हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर बार बार यही आरोप लग रहे हैं कि वह भारतीयों पर हो रहे हमलों को या अन्य भारतीयों से जुड़ी घटनाओं के मूक दर्शक बनकर देख रही है।





