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Friday, March 6, 2026
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Lata Mangeshkar: लता जी..! गाना सुनकर मां भगा दिया करती थीं, 36 भाषाओं में 50 हजार गाने, आखिरी रहा यह गाना

Lata Mangeshkar Birthday: स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी की आज 94वीं जयंती है। भारत रत्न, पद्य विभूषण से सम्मानित इस गायिका ने 80 साल तक गाना गाया।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी की आज 94वीं जयंती है। भारत रत्न, पद्य विभूषण से सम्मानित इस गायिका ने 80 साल तक गाना गाया। 4 या 5 नहीं, 36 भाषाओं में गाने गाए। 50 हजार गानों को अपने सुरों से सजाया। हिंदी फिल्मों में हजारों गाने गए। उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज है, लेकिन लता जी का पहला गाना फिल्म से हटा दिया गया था।

मराठी फिल्म से हटाया गया था गाना

लता मंगेशकर ने 1942 में मराठी फिल्म किती हसाल में नाचू या गड़े खेलू सारी मनी हौस भारी गाना गाया था। फिल्म जब रिलीज हुई तो लता जी को पता चला की यह गाना तो फिल्म में है ही नहीं। लता जी ने आमिर खान की 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती में आखिरी बार गाना गाया था। इस फिल्म का क्लासिक गाना लुका छुपी को लता जी ने अपनी सुरीली आवाज दी थी।

वीर-जारा में भी कई गाने गाए

लता मंगेशकर ने फिल्म रंग दे बसंती के गाने के अलावा वीर-जारा के लिए कई गानों को आवाज दी थी। इन गानों में-तेरे लिए हम हैं जिए, ऐसा देस है मेरा, हम तो भाई जैसे हैं, दो पल रुका ख्वाबों का कारवां शामिल हैं।

5 साल की उम्र से संगीत सीखा, 1942 में करियर की शुरुआत

लता मंगेशकर 5 साल की उम्र से संगीत सीख रही थीं। दिलचस्प बात है कि जब लता जी गाना गाती थीं तो उनकी मां डांटकर भगा देती थीं। दरअसल, घर की रसोई में मां के काम में हाथ बंटाने पहुंचती थी तो महिलाओं को लता जी गाकर सुनाती थीं। इस पर मां उन्हें डांटकर भगा देती थीं। मां का मानना था कि लता की वजह से महिलाओं का समय बर्बाद होता है। इन्होंने 1942 में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। फिल्म महल के गाना आएगा आने वाला गाया था।

पहली बार मंच पर गाने पर 25 रुपए मिले थे

लता जी ने पिता से संगीत सीखी थीं। पिता की मौत के बाद लता जी ने अपने पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली थी। पहली बार मंच पर गाना गाने पर लता जी को 25 रुपए मिले थे। वह इसे अपनी पहली कमाई मानती थीं। वहीं, 13 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म पहिली मंगलागौर में एक्टिंग भी की थी।

डूंगरपुर घराने के महाराजा राज सिंह से करती थीं प्यार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लता जी को डूंगरपुर राजघराने के महाराजा राज सिंह से बेहद प्यार था। महाराजा राज सिंह और लता जी के भाई हृदयनाथ से अच्छे दोस्त भी थे। हालांकि दोनों का प्यार मुक्कमल नहीं हुआ। महाराजा ने अपने पिता से वादा किया था कि वह किसी आम घर की लड़की को अपने घर की बहू नहीं बनाएंगे, जिसे उन्होंने निभाया। इधर, लता जी ने शादी नहीं की।

खाने-पीने की बड़ी शौकीन थीं

लता जी खाने-पीने की बहुत ही शौकीन थीं। कॅरियर के गोल्डन फेज में वह रिकॉर्डिंग से पहले भी आइसक्रीम खाया करती थी। सिंगर होने के बावजूद अचार, मिर्च आदि से कभी परहेज नहीं किया। उन्हें केसर जलेबी बहुत पसंद थी।

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