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Sunday, March 15, 2026
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कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप में फंसे AR Rahman, जानें क्‍या है ‘वीरा राजा वीरा’ विवाद?

एक गाने को लेकर ए.आर. रहमान की मुसीबतें बढ़ गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के मामले में अंतरिम आदेश पारित किया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । तमिल फिल्म के गाने को लेकर मशहूर संगीतकार ए.आर. रहमान मुसीबत में फंस गए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ एक अंतरिम फैसला सुनाया है। यह फैसला शास्त्रीय गायक और पद्मश्री सम्मानित उस्ताद फैयाज वासिफुद्दीन डागर की ओर से दायर एक कॉपीराइट उल्लंघन के केस के संदर्भ में आया है। मामला तमिल फिल्म पोन्नियिन सेलवन 2 के चर्चित गीत “वीरा राजा वीरा” से जुड़ा है, जिसे अदालत ने डागर परिवार की पारंपरिक रचना “शिव स्तुति” की लगभग हूबहू नकल माना है। 

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने क्‍या कहा ?

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि फिल्म पोन्नियिन सेलवन 2 का गीत “वीरा राजा वीरा” महज़ “शिव स्तुति” से प्रेरित नहीं, बल्कि उसकी लगभग पूरी तरह से नकल है, जिसमें केवल मामूली फेरबदल किए गए हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की एकल पीठ ने ए.आर. रहमान और फिल्म निर्माण कंपनी मैड्रास टॉकीज़ को निर्देश दिया है कि वे इस गीत के क्रेडिट में सुधार करें और मूल रचना के लिए स्वर्गीय उस्ताद नासिर जहीरुद्दीन डागर तथा स्वर्गीय उस्ताद नासिर फ़ैयाज़ुद्दीन डागर को विधिवत श्रेय दें।

दिल्ली HC ने लगाया आर्थिक जुर्माना

दिल्ली हाईकोर्ट ने न सिर्फ आदेश दिया, बल्कि आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को निर्देश दिया कि वे 2 करोड़ रुपये की राशि कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करें, साथ ही वादी उस्ताद फैयाज वासिफुद्दीन डागर को 2 लाख रुपये की कानूनी लागत के रूप में अदा करें। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने यह भी अनिवार्य किया कि ओटीटी और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक नया क्रेडिट स्लाइड शामिल किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख हो कि यह रचना स्वर्गीय उस्ताद एन. फैयाज़ुद्दीन डागर और स्वर्गीय उस्ताद जहीरुद्दीन डागर द्वारा रचित “शिव स्तुति” पर आधारित है।

क्या है पूरा मामला?

पद्मश्री से सम्मानित शास्त्रीय गायक फैयाज वासिफुद्दीन डागर ने अदालत में दावा किया कि तमिल फिल्म पोन्नियिन सेलवन 2 का गीत वीरा राजा वीरा शिव स्तुति से सीधे तौर पर कॉपी किया गया है। यह रचना उनके पिता स्वर्गीय उस्ताद नासिर फैयाज़ुद्दीन डागर और चाचा स्वर्गीय उस्ताद जहीरुद्दीन डागर द्वारा तैयार की गई थी। डागर ने कोर्ट में दलील दी कि भले ही गीत के बोल अलग हों, लेकिन उसकी ताल, लय और संगीतमय संरचना मूल शिव स्तुति से बेहद मेल खाती है। उन्होंने यह भी बताया कि शिव स्तुति को ‘जूनियर डागर ब्रदर्स’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया गया है और यह कई एल्बमों के माध्यम से पैन रिकॉर्ड्स द्वारा जारी की जा चुकी है। 

इस कथित उल्लंघन के विरोध में डागर ने अदालत से अपील करते हुए मांग की कि ए.आर. रहमान, मैड्रास टॉकीज और अन्य संबंधित पक्षों पर इस गीत के उपयोग को रोकने, क्षतिपूर्ति की मांग करने और उनके नैतिक अधिकारों को मान्यता देने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा जारी की जाए।

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