नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग हो रही है। इन सीटों पर 16 मंत्रियों की किस्मत भी ईवीएम में कैद होगी। इसमें 11 बीजेपी और 5 JDU के मंत्री चुनावी मैदान में हैं, जो अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव जीतने की कोशिश करेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में दोनों डिप्टी सीएम समेत कई बड़े नेता जनता की अदालत में हैं। पहले चरण की 121 सीटों पर वोटिंग के दौरान 16 मंत्रियों सहित कई प्रमुख नेताओं की किस्मत ईवीएम में कैद होगी। जनता की प्रतिक्रिया से राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना है।
पहले फेज में 16 मंत्रियों की किस्मत दांव पर
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ही हाई वोल्टेज कॉन्टेस्ट देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस फेज में सरकार के 16 मंत्रियों की किस्मत दांव पर है। इन सीटों पर मतदान के परिणाम राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं और जनता की प्रतिक्रिया से भविष्य की दिशा तय होगी।
पहले चरण में बीजेपी के 11 मंत्री मैदान में
पहले चरण के चुनाव में कुल 16 मंत्रियों की किस्मत दांव पर है, जिनमें 11 बीजेपी और 5 JDU के मंत्री शामिल हैं। दोनों डिप्टी सीएम भी इसी फेज में चुनावी मैदान में हैं। सम्राट चौधरी (तारापुर) और विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय) अपने-अपने गढ़ को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बीजेपी के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे (सीवान) भी चुनाव लड़ रहे हैं।
इस पहले चरण के चुनाव में कई प्रमुख चेहरे भी मैदान में हैं। इनमें नितिन नवीन (बांकीपुर), जीवेश कुमार मिश्रा (जाले), संजय सरावगी (दरभंगा शहरी), केदार प्रसाद गुप्ता (कुढ़नी), राजू कुमार (साहेबगंज), कृष्ण कुमार मंटू (अमनौर), सुनील कुमार (बिहारशरीफ) और सुरेंद्र मेहता (बछवाड़ा) शामिल हैं, जो अपनी-अपनी सीटों पर कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
JDU की तरफ से ये नेता हैं मैदान में
पहले चरण में JDU की तरफ से भी कई बड़े चेहरे चुनावी मुकाबले में हैं। इनमें विजय कुमार चौधरी (सराय रंजन), श्रवण कुमार (नालंदा), मदन सहनी (बहादुरपुर), महेश्वर हजारी (कल्याणपुर) और रत्नेश सदा (सोनबरसा) शामिल हैं, जो अपनी-अपनी सीटों पर जीत के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बीजेपी और JDU की असली परीक्षा
पहले चरण के चुनाव में इन सभी नेताओं की किस्मत का फैसला आज जनता करेगी। यह सिर्फ 121 सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि बीजेपी और JDU की बड़ी लीडरशिप की परफॉर्मेंस की असली परीक्षा भी है, जो अगले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगी।





