नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत का कारण बने Coldrif Cough Syrup मामले में अब बड़ा एक्शन लिया गया है। SIT ने श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स के मालिक रंगनाथन गोविंदन को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि उन्हें 8 अक्टूबर की रात चेन्नई से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर मध्यप्रदेश लाया जाएगा।
कैसे हुआ मामला शुरू?
पिछले दो हफ्तों में छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में कई बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी बच्चों ने Coldrif Cough Syrup पीया था। इसके बाद उन्हें उल्टी, पेशाब में परेशानी और तेज बुखार जैसे लक्षण दिखे। जांच में पाया गया कि बच्चों की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था। अब तक 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। सभी मृतक बच्चे 2 से 5 साल की उम्र के थे। कई को नागपुर और भोपाल रेफर किया गया था।
जांच में क्या निकला?
SIT की जांच में सामने आया कि कंपनी ने ग्लिसरॉल की जगह डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) का इस्तेमाल किया था। यह एक जहरीला केमिकल है, जो इंसानी शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। इसी रसायन के कारण पहले भी गाम्बिया (2022) और उज्बेकिस्तान (2023) में बच्चों की मौत हो चुकी है। कंपनी ने बिना पूरी जांच किए कई बैच मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में भेज दिए थे। श्रीसन फार्मा (Srisun Pharma) तमिलनाडु की कंपनी है। पहले भी यह गुणवत्ता उल्लंघन (Quality Violation) के मामलों में फंस चुकी है। इस बार भी कंपनी की लापरवाही से कई मासूमों की जान चली गई।
सरकार का एक्शन और सख्त जांच
मध्यप्रदेश सरकार ने इस मामले में SIT (Special Investigation Team) बनाई थी, जिसने अब तक कई अहम कदम उठाए हैं। कंपनी के मालिक रंगनाथन गोविंदन गिरफ्तार दो मेडिसिन कंट्रोलर और एक उपनिदेशक निलंबित स्टेट मेडिसिन कंट्रोलर का तबादला छिंदवाड़ा के डॉक्टर प्रवीण सोनी गिरफ्तार, जिन पर गलत दवा लिखने का आरोप है एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक कृत्य है। अगर यह साबित हुआ कि कंपनी ने जानबूझकर जहरीले केमिकल का इस्तेमाल किया, तो आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या (IPC 304) का केस चलेगा।
मासूमों की मौत पर देशभर में गुस्सा
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लोगों का कहना है कि बच्चों की जान लेने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने आश्वासन दिया है कि ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए दवा निर्माण प्रक्रिया पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।





