नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद बुधवार को बड़ा ऐलान किया गया। मीटिंग के बाद कहा गया कि, रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा, जिससे निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए मौद्रिक स्थिति स्थिर बनी रहेगी।
RBI का बड़ा फैसला
अगस्त के बाद अक्टूबर में भी रेपो रेट 5.5 प्रतिशत पर कायम रहेगा। इसके पहले इस साल 100 बेसिस प्वाइंट तक कटौती की गई थी। वहीं, RBI ने GDP ग्रोथ रेट को 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो अर्थव्यवस्था के स्थिर और सकारात्मक विकास का संकेत है।
टैरिफ वॉर के बीच मीटिंग अहम
इस साल यह दूसरी बार है जब रेपो रेट को यथावत रखा गया है। ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जरूरी सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करने के बाद, RBI की यह मौद्रिक नीति समिति की बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
बाजार के जानकार पहले ही उम्मीद जता रहे थे कि मजबूत GDP वृद्धि और नियंत्रित महंगाई को देखते हुए, RBI दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला कर सकता है।
रेपो रेट में बदलाव नहीं
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का यह फैसला ऐसे समय आया है जब GST रिफॉर्म लागू होने के बाद रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के दाम घटा दिए गए हैं। इस फैसले में जीएसटी रिफॉर्म के साथ-साथ हाल ही में अमेरिकी सरकार द्वारा H1B वीजा फीस बढ़ाने का भी असर देखा गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि घरेलू स्तर पर जीएसटी रिफॉर्म और महंगाई नियंत्रण जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। बाजार को उम्मीद थी कि RBI इस बार सतर्क और संतुलित रुख अपनाएगा।
फैसले से और क्या बदलाव आया?
लोन और EMI लेने वालों के लिए फिलहाल कोई राहत नहीं है, क्योंकि ब्याज दरें यथावत रहेंगी। बैंकों के लिए भी उधारी की लागत में कोई बदलाव नहीं होगा। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि RBI फिलहाल स्थिरता बनाए रखना चाहता है और किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं है। इसका असर शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट और रुपये की चाल पर दिखाई दे सकता है।
क्या असर होगा इस फैसले से?
बता दें कि, ब्याज दरें स्थिर रहने से इसका मिला-जुला असर देखा जा सकता है। निवेशकों के लिए राहत की बात है कि, लोन डिमांड बनी रहेगी। चूंकि ब्याज दरें नहीं बढ़ीं, इसका मतलब है कि, होम लोन और ऑटो लोन महंगे नहीं होंगे, जिससे आम ग्राहकों को फायदा होगा।
विदेशी निवेशकों (FII) के लिए यह संकेत है कि, RBI सावधानीपूर्वक कदम बढ़ा रहा है। इससे बाजार में थोड़ी स्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं का असर अभी भी बना रहेगा।





