नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। जहान कपूर और राहुल भट स्टारर वेब सीरीज ‘ब्लैक वारंट’ आज 10 जनवरी को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। इस शो में कुख्यात रंगा और बिल्ला और उनकी कहानी को दिखता है। रंगा और बिल्ला बेहद खूंखार अपराधी थे। उन्होंने काफी लूट, हत्याएं, समेत तमाम आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया था। उन्होंने गीता और संजय की हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों को 1982 में फांसी दी गई थी।
क्या था पूरा मामला
रंगा और बिल्ला एक ऐसे अपराधी थे जो पैसों के लिए कुछ भी कर सकते थे। उनका नाम काई आपराधिक घटनाओं में शामिल था। लेकिन उनका केस हाइलाइट टी हुआ जब दोनों अपराधी ने गीता और संजय की हत्या कर दी। गीता और संजय के पिता एमएम चोपड़ा थे जोकि भारतीय नौसेना में कैप्टन थे।ये कहानी 1978 में अगस्त के महीने की हैं जब दोनों भाई बहन ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के ऑफिस में कार्यक्रम के लिए जा रहे थे। दोनों बच्चों का कार्यक्रम 9 बजे खत्म होना था और उन दिन बारिश भी काफी हो रही थी। दोनों रास्ते में एक साथ जा रहे थे तभी वहां कार पहुंची और उनका अपहरण कर लिया। चौराहे पर स्थित दुकान के मालिक ने उस कार में हलचल देखी तो उन्होंने पुलिस को अपहरण की सूचना दी। उसी दौरान एक इसी घटना से संबंधित रिपोर्ट राजिंदर नगर थाने में दर्ज की गई थी।
रंगा-बिल्ला का ये पूरा प्लान
दुकान के मालिक की शिकायत पर पुलिस इस घटना की जांच में लग गई और कंट्रोल रूम को भीसुचना दे दी थी। इस दौरान इस घटना में जांच के दौरान दोनों की लाशें मिलीं। इस घटना को अंजाम कुलजीत उर्फ रंगा खुश और जसबीर सिंह उर्फ बंगाली उर्फ बिल्ला ने दिया था। इस घटना के बाद से फरार चल रहे थे। लेकिन दोनों आगरा स्टेशन के पास कालका मेल ट्रेन में चुपचाप चढ़ गए। ये ट्रेन दिल्ली की ओर जा रही थी। वो जिस डिब्बे में दोनों चढ़े, वह कोच सेना का था। इसके बाद जवानों ने उन्हें पकड़ लिया और दिल्ली पहुंचते ही पुलिस के हवाले किया।इसके बाद ये पता चला था की दोनों अपराधी ने पकड़े जाने के डर से दोनों को मार डाला था। एक रिपोर्ट के अनुसार ये भी पता चला था कि अपराधी ने हत्या से पहले गीता चोपड़ा के साथ दुष्कर्म भी किया था।
कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा
रंगा-बिल्ला को पकड़ने के बाद उनका बयान भी लिया गया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने रंगा-बिल्ला को मौत की सजा सुनाई। बाद में सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने भी मौत की सजा को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अप्रैल, 1979 को दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी। 31 जनवरी, 1982 को दोनों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। लेकिन ये जानकर आपको हैरानी होगी की फांसी के बाद भी रंगा जिंदा था। फांसी के 2 घंटे बाद जब डॉक्टर फांसी घर में पोस्टमॉर्टम से पहले दोनों के शव की जांच करने के लिए गए तो जब रंगा की नब्ज जांची तो वो चल रही थी और वह जिंदा था। इसके बाद जल्लाद ने रंगा के गले में लगे फंदे को नीचे से फिर खींचा, जिससे उसकी मौत हुई।
सुनील गुप्ता और सुनेत्रा चौधरी की किताब है ब्लैक वारंट
सुनील गुप्ता और सुनेत्रा चौधरी की 2019 में आई किताब ‘ब्लैक वारंट में इस पूरी घटना का जिक्र हुआ है। ये किताब उस समय खूब मशहूर हुई थी। वहीं अब इस पर आधारित वेब सीरीज ‘ब्लैक वारंट’ भी आज 10 जनवरी को OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर स्ट्रीम हो गई है।





