ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट लॉन्च! क्यों पड़ा यह नाम? SS राजामौली ने बताया

ISRO ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM-3 (बाहुबली) से भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जिसे इसकी अपार ताकत और भारोत्तोलन क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ नाम मिला है।

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ISRO's 'Bahubali' rocket launch
ISRO's 'Bahubali' rocket launch

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को अपने एक ऐतिहासिक मिशन के तहत भारत की धरती से अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह (CMS-03) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस शक्तिशाली रॉकेट को प्यार से ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है, जिसे लेकर मशहूर फिल्म निर्देशक एस.एस. राजामौली और उनकी फिल्म की टीम ने सोशल मीडिया पर जमकर जश्न मनाया।राजामौली ने इस नामकरण के पीछे ISRO का तर्क दुनिया के सामने रखा और बताया कि क्यों उनकी पूरी टीम इस बात से रोमांचित है। 

राजामौली की ‘बाहुबली’ थ्योरी


फिल्म ‘बाहुबली’ के निर्देशक एस.एस. राजामौली ने ISRO के सफल प्रक्षेपण पर बधाई दी और रॉकेट को ‘बाहुबली’ नाम दिए जाने पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, हमारी पूरी ‘बाहुबली’ टीम उत्साहित है कि ISRO ने इस रॉकेट को ‘बाहुबली’ नाम दिया है… यह नाम इसे इसके भारी वजन (Heaviness) और ताकत (Strength) के कारण दिया गया है… यह हम सभी के लिए वास्तव में एक सौभाग्य की बात है।

राजामौली के अनुसार, रॉकेट को यह नाम उसकी जबरदस्त भारोत्तोलन क्षमता और मजबूत निर्माण के कारण दिया गया है, जो उनकी फिल्म के मुख्य किरदार की ताकत और भव्यता को दर्शाता है।

ISRO के रॉकेट का असली ‘बाहुबल’


ISRO के इस रॉकेट का आधिकारिक नाम LVM-3 M5 (Launch Vehicle Mark-3 M5) है, लेकिन इसे ‘बाहुबली’ नाम इसके विशिष्ट गुणों के कारण मिला:

भारोत्तोलन क्षमता: LVM-3 भारत का सबसे शक्तिशाली और स्वदेशी लॉन्च व्हीकल है। यह 4,000 किलोग्राम तक के पेलोड को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित करने की क्षमता रखता है।

सबसे भारी सैटेलाइट: इस मिशन में इसने 4,410 किलोग्राम वजन वाले CMS-03 संचार उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया, जो भारत की धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है।

रक्षा और संचार: CMS-03 (जिसे GSAT-7R भी कहा जाता है) भारतीय नौसेना के लिए सबसे उन्नत संचार उपग्रह है, जो समुद्री क्षेत्र में तेज और सुरक्षित संचार कवरेज प्रदान करेगा।

फिल्म ‘बाहुबली’ की टीम ने लॉन्च का वीडियो रीपोस्ट करते हुए लिखा, “बाहुबली भावना सचमुच कोई सीमा नहीं जानती, दुनिया भर के दिल जीतने से लेकर अब आसमान को जीतने तक!”

ISRO के ‘बाहुबली’ LVM-3 रॉकेट के ऐतिहासिक मिशन

LVM-3 (जिसे पहले GSLV Mk III नाम से जाना जाता था) की शुरुआत 2014 में हुई थी और तब से इसने कई निर्णायक मिशनों में अपनी ताकत साबित की है। 


1. चंद्रयान-2 मिशन (जुलाई 2019)

महत्व: यह रॉकेट का सबसे प्रसिद्ध और महत्वाकांक्षी मिशन था। LVM-3 ने चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान (जिसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर ‘विक्रम’ और एक रोवर ‘प्रज्ञान’ शामिल थे) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया।इस मिशन ने चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित होकर भारत को चंद्र अन्वेषण में एक प्रमुख शक्ति बना दिया।

2. वनवेब (OneWeb) वाणिज्यिक मिशन (अक्टूबर 2022 और मार्च 2023)


महत्व: LVM-3 रॉकेट ने वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में ISRO की क्षमता को स्थापित किया। यह ISRO की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।इन मिशनों के तहत LVM-3 ने वैश्विक संचार कंपनी वनवेब (OneWeb) के 36 उपग्रहों को उनकी निचली पृथ्वी की कक्षा (LEO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया।मार्च 2023 का मिशन LVM-3 का पहला परिचालन (Operational) लॉन्च था और एक ही बार में 36 उपग्रह ले जाने की इसकी क्षमता ने इसकी विशाल पेलोड क्षमता को सिद्ध किया।



3. चंद्रयान-3 मिशन (जुलाई 2023)


महत्व: यह LVM-3 रॉकेट के इतिहास का सबसे निर्णायक और गौरवशाली मिशन है।LVM-3 ने चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को सटीकता के साथ प्रक्षेपित किया, जिसने बाद में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरकर भारत को यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बनाया।

4. CMS-03 (GSAT-24) मिशन (जून 2022)


महत्व: यह रॉकेट का एक और महत्वपूर्ण संचार मिशन था, जो टाटा प्ले (Tata Play) की डीटीएच सेवाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए समर्पित था।LVM-3 ने इस संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया, जिसने भारत की संचार क्षमताओं को और मजबूत किया।

5. पहले विकास परीक्षण (Developmental Flights)


पहला विकास मिशन (D1 – दिसंबर 2014): हालांकि यह एक परीक्षण उड़ान थी, इसने पेलोड के रूप में एक क्रू मॉड्यूल वायुमंडलीय पुनःप्रवेश प्रयोग किया और रॉकेट की क्षमता का प्रदर्शन किया।

दूसरा विकास मिशन (D2 – जून 2017): इस मिशन ने एक संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक GTO में स्थापित किया और LVM-3 की परिचालन क्षमता को प्रमाणित किया।

LVM-3 रॉकेट को ‘बाहुबली’ नाम उसकी जबरदस्त शक्ति, विश्वसनीयता, और जटिल एवं भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की क्षमता के कारण दिया गया है। यह ISRO के आगामी महत्वाकांक्षी मिशनों, जिनमें गगनयान (Gaganyaan) जैसे मानव अंतरिक्ष मिशन भी शामिल हैं।

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