नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर सख्त सैन्य कार्रवाई की है। पल्मायरा क्षेत्र में हुए हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद पेंटागन ने जवाबी कदम उठाते हुए बड़े स्तर पर एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन हॉकआई’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य ISIS के ठिकानों और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना बताया जा रहा है।
पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 13 दिसंबर को सीरिया में एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक की जान चली गई थी, जबकि तीन अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी घटना के बाद अमेरिका ने यह सैन्य अभियान शुरू करने का फैसला लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने नागरिकों और सेना पर किसी भी तरह के हमले को स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना था कि जो भी संगठन या समूह दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को निशाना बनाएगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मध्य सीरिया में अमेरिका ने तबाह किए 70 से अधिक ISIS ठिकाने
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ‘ऑपरेशन हॉकआई’ अभियान के तहत मध्य सीरिया में ISIS से जुड़े करीब 70 ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में आतंकियों के छिपने के ठिकानों के साथ-साथ हथियार भंडार और ट्रेनिंग सेंटर भी ध्वस्त किए गए। पेंटागन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि हालात के मुताबिक आने वाले दिनों में और भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य ISIS के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना और संगठन की गतिविधियों पर लगातार दबाव बनाए रखना है।
इस्तेमाल किए हाईटेक एयरक्राफ्ट और रॉकेट सिस्टम
इस सैन्य अभियान में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपनी आधुनिक सैन्य शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। हमलों में एफ-15 ईगल फाइटर जेट, ए-10 थंडरबोल्ट अटैक एयरक्राफ्ट, AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर और HIMARS रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, जॉर्डन के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने भी इस ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे हमलों की ताकत और गति दोनों बढ़ गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन हॉकआई पर प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट संदेश दिया कि अमेरिका अपने नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इन हमलों का मकसद ISIS के मजबूत गढ़ों को निशाना बनाना है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि कोई भी आतंकी संगठन अमेरिका पर हमला करने या धमकी देने की कोशिश करेगा, उसे पहले से कहीं ज्यादा सख्त और खतरनाक जवाब का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के प्रति अपना समर्थन दोहराया और उनके साथ सहयोग जारी रखने का भरोसा जताया।
असद के बाद अमेरिका-सीरिया संबंधों में बदलाव
बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका और सीरिया के बीच रिश्तों में नया बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने वॉशिंगटन का दौरा किया और अमेरिकी नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। यह ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि 1946 के बाद यह पहली बार हुआ है जब किसी सीरियाई राष्ट्रपति ने व्हाइट हाउस का दौरा किया। इस दौरे से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार और सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।





