नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों के लिए कई तरह की बचत योजनाएं चला रहा है। पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में RD, TD, MIS, SCSS, PPF, SSA, KVP जैसी तमाम योजनाएं शामिल हैं। पोस्ट ऑफिस टीडी स्कीम पर बैंकों की एफडी से ज्यादा ब्याज दे रहा है।
ऐसे में यह निवेशकों के लिए अच्छी खबर! डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम पर इस समय बैंकों से ज्यादा ब्याज मिल रहा है। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (TD) स्कीम सुरक्षित निवेश विकल्प चाहने वालों के लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो रही है। खास बात यह है कि सिर्फ 1 लाख रुपये जमा करने पर आप 3 साल में 23,508 रुपये का पक्का ब्याज कमा सकते हैं।
क्या है पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम?
यह स्कीम बिल्कुल बैंकों की एफडी की तरह काम करती है। निवेशक इसमें तय अवधि के लिए पैसा जमा करते हैं और समय पूरा होने पर उन्हें मूलधन के साथ तय ब्याज मिलता है। इस स्कीम में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल के लिए निवेश किया जा सकता है।
कितना ब्याज मिल रहा है?
डाकघर फिलहाल ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दरें ऑफर कर रहा है-
1 साल की एफडी – 6.9%
2 साल की एफडी – 7.0%
3 साल की एफडी – 7.1%
5 साल की एफडी – 7.5%
यानी लंबी अवधि पर ब्याज दर और ज्यादा है।
1 लाख पर कितना मिलेगा मुनाफा?
अगर आप पोस्ट ऑफिस में 3 साल के लिए 1 लाख रुपये जमा करते हैं तो मैच्योरिटी पर आपको कुल 1,23,508 रुपये मिलेंगे। इसमें आपका मूलधन 1 लाख रुपये और ब्याज के रूप में 23,508 रुपये शामिल होंगे।
कितना कर सकते हैं निवेश?
न्यूनतम निवेश- 1,000 रुपये
अधिकतम निवेश- कोई सीमा नहीं
खाता प्रकार- सिंगल और जॉइंट, जिसमें अधिकतम 3 लोग शामिल हैं।
क्यों है ये बेहतर विकल्प?
बैंकों में जहां वरिष्ठ नागरिकों को कुछ विशेष योजनाओं पर अतिरिक्त ब्याज दिया जाता है, वहीं पोस्ट ऑफिस की एफडी में सभी निवेशकों के लिए एक समान ब्याज दर तय है। सुरक्षित निवेश चाहने वाले लोगों के लिए यह एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।
बता दें कि, अगर आप जोखिम से बचते हुए बेहतर रिटर्न चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट स्कीम आपके लिए सही विकल्प हो सकती है। खासकर लंबे समय के निवेश पर मिलने वाला 7.5% ब्याज इसे बैंकों की तुलना में ज्यादा फायदेमंद बनाता है।
Disclaimer: ये लेख सिर्फ सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले या वित्तीय जोखिम लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।





