नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । गोरखपुर के खोराबार स्थित मालवीय नगर श्रीराम बस्ती खेल मैदान में बुधवार को आयोजित हिंदू सम्मेलन में RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म केवल एक धार्मिक मार्ग नहीं, बल्कि मानव धर्म है, जो सभी के लिए खुला है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी देश या पंथ के लोग अपने रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जी सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नमाज पढ़ने वाले मुस्लिम भाई पर्यावरण की दृष्टि से नदी की पूजा कर सकते हैं या सूर्य नमस्कार कर सकते हैं, प्राणायाम कर सकते हैं, इसमें कोई बाधा नहीं है, यह किसी तरह से गलत नहीं है।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हिंदू धर्म ऐसा है जो सदियों से संघर्ष और आक्रांताओं के सामने टिककर सभी के लिए सम्मानजनक मार्ग प्रदान करता आया है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदू धर्म में किसी को अपनी पूजा छोड़ने या किसी अन्य धर्म अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाता, यह धर्म मानवता और सहिष्णुता का प्रतीक है।
हिंदू संस्कृति और संस्कारों को जीवन में उतारना सभी का कर्तव्य
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारतीयों की बुद्धिमत्ता, प्रतिभा और मेहनत को दुनियाभर में सराहा जा रहा है। लोग भारत की संस्कृति को जानने और अपनाने में उत्सुक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रूस में चर्च को मंदिर में बदलने की अनुमति मिली, वहीं अमेरिका में हिंदू समुदाय द्वारा कई मंदिर स्थापित किए जा रहे हैं और वहां लोग सूर्य नमस्कार और प्राणायाम जैसी प्रथाओं को अपना रहे हैं। जर्मनी के कई विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है और आयुर्वेद का अध्यापन भी हो रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। हिंदू धर्म, हिंदुत्व और संस्कृति की श्रेष्ठताओं को अपने जीवन में उतारना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाकर समाज और देश की संस्कृति को सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए।
दत्तात्रेय होसबाले ने दी चेतावनी
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि हिंदू समाज की संख्या बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी तरह के बाहरी दबाव या षड्यंत्र के तहत धर्म परिवर्तन का शिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि धर्म परिवर्तन के नाम पर कई जगह गरीब और पिछड़े वर्गों के लोग प्रभावित हो रहे हैं, जिनको समाज में कमतर दर्जा दिया गया या अछूत माना गया। खासकर जनजातीय क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के प्रति सतर्क रहना और समाज की एकता और पहचान बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।
“धर्म का नियम सभी के लिए समान”
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि धर्म का मूल नियम सभी के लिए समान है। उन्होंने बताया कि लोग अपने-अपने पंथ और मार्ग अपना सकते हैं, चाहे वह शैव, वैष्णव, जैन, बौद्ध या द्वैत-अद्वैत हो। उन्होंने इसे एक ‘गाड़ी’ से तुलना करते हुए समझाया कि कोई आज शैव है, कल वैष्णव बन सकता है, कोई आज सनातनी है, कल सिख बन सकता है। व्यक्ति अपने मार्ग बदल सकता है, लेकिन धर्म के मूल नियम और सिद्धांत नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि धर्म के इन नियमों का पालन करना आवश्यक है और यही हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया। इसलिए जब हम हिंदू धर्म की बात करते हैं, तो यह केवल किसी एक पंथ का नहीं बल्कि मानवता और जीवन मूल्यों का धर्म है, जिसे दुनिया के लोग अपने तरीके से अपना सकते हैं।





