नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi )कहा जाता है, जिसे विशेष स्थान दिया गया है। इस एकादशी के दिन लोग विष्णु भगवान की पूजा अर्चना करते हैं साथ ही उनका व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सौभाग्य और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।तो चलिए ये कब मनाई जाएगी इसकी जानकारी जानते हैं।
इस दिन मनाई जाएगी वरुथिनी एकादशी
इस साल 2026 में यह व्रत पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को रात 1 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 14 अप्रैल को रात 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म में व्रत रखने का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है, इसलिए इस बार वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा।इस दिन ही लोग विष्णु भगवान का व्रत रखेंगे।
वरुथिनी एकादशी का महत्त्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को दान, तप और यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से राजसुख, धन-समृद्धि और दुर्भाग्य से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति को जीवन में सुरक्षा (वरुथिनी का अर्थ ‘रक्षा करने वाली’) प्राप्त होती है और सभी कष्ट दूर होते हैं।
पूजा विधि
इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें पीले वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप और तुलसी दल अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। दिनभर व्रत रखें और फलाहार करें। इस दिन दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है, जैसे अन्न, वस्त्र या धन का दान।
विष्णु भगवान की आरती
“ॐ जय जगदीश हरे”
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी॥
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
परब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूर्ख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे।
करुणा हस्त बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥





