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Tuesday, March 24, 2026
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Chaitra Navratri के पहले दिन करें मां शैलपुत्री के इन मंत्रों का करें जाप, प्रसन्न होंगी देवी

Chaitra Navratri के पहले दिन मां शैलपुत्री के इन विशेष मंत्रों का जाप करें। इससे देवी प्रसन्न होंगी और आपके जीवन में सुख, समृद्धि आएगी।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्रि आते ही हर व्यक्ति माता रानी की भक्ति में लग जाता है। नवरात्रि का त्योहार माता दुर्गा को समर्पित होता है। इन दिनों उनके नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त की जाती है। आज से नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और हर व्यक्ति नवरात्रि के इस खास पर्व पर माता रानी की पूजा अर्चना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। नवरात्र का पहला दिन माता शैलपुत्री को समर्पित होता है।आज के दिन आपको उनके पूजा अर्चना के साथ-साथ मंत्रों का भी जाप करना चाहिए।

पूजा अर्चना की विधि

नवरात्रि के पहले दिन आपको घंट स्थापना करने के बाद माता की पूजा अर्चना शुरू होती है। ये नवरात्रि 9 दिन तक चलती है इस दौरान सबसे पहले आपके घर में कलश रखना होता है। अगर आप 9 दिन का व्रत रख रहे हैं तो आपको माता रानी के समक्ष अखंड ज्योति जलाना चाहिए। लेकिन आपको यह कोशिश करना चाहिए की ज्योति सदैव 9 दिन तक जलती रहे। जब भी इसमें घी की कमी हो आप उसे भर दें। इसके साथ ही रात में आपको भजन-कीर्तन करके माता रानी को प्रसन्न करना चाहिए। मां शैलपुत्री को गाय के घी या सफेद मिठाई का भोग लगाने से अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।

माता शैलपुत्री की पूजा का महत्व

मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप को ‘शैलपुत्री’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह हिमालय पर्वत के राजा हिमवान की कन्या थीं। इस रूप में मां दुर्गा को त्रिशूल और चंद्रमा के साथ देवी के सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है। शैलपुत्री की पूजा से शक्ति और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। पूजा करते समय मां की मूर्ति को पुष्प, चंदन, कुमकुम, और रोली से सजाकर स्थान पर रखें। धूप, दीप और फल चढ़ाएं। मां की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।

इन मंत्रों का करें जाप

या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।

“वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”

ॐ देवी शैलपुत्री नमः

ह्रीं शिवायै नम:।

ऊँ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।

मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगक की

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