नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को दोपहर 2:30 बजे तक सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक और निफ्टी 300 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार की इस हलचल का असर म्यूचुअल फंड्स पर भी पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा डगमगाया नहीं है। खासतौर पर सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने नियमित निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठता है-अगर आप हर महीने 5,000 रुपये की SIP करें, तो 20 साल में कितना बड़ा फंड तैयार हो सकता है?
20 साल में बन सकता है लाखों का कोष
अगर कोई निवेशक हर महीने 5,000 रुपये की SIP शुरू करता है, तो 20 साल में उसका कुल निवेश 12 लाख रुपये होगा (5,000 × 12 × 20)। अब बात करते हैं संभावित रिटर्न की। यदि इस निवेश पर औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो 20 वर्षों में लगभग 46 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है। इसमें 12 लाख रुपये मूल निवेश और करीब 34 लाख रुपये अनुमानित मुनाफा शामिल होगा।
वहीं, यदि बाजार बेहतर प्रदर्शन करे और औसतन 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिले, तो यही 5,000 रुपये की मासिक SIP करीब 66.35 लाख रुपये का कोष बना सकती है। इसमें 12 लाख रुपये आपका निवेश और लगभग 54.35 लाख रुपये अनुमानित रिटर्न होगा। यही है कंपाउंडिंग की ताकत-जहां समय के साथ रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है और छोटी राशि बड़ा फंड बन जाती है।
निवेश से पहले समझ लें जोखिम और नियम
हालांकि SIP निवेश का लोकप्रिय और अनुशासित तरीका है, लेकिन यह पूरी तरह बाजार से जुड़ा होता है। इसमें रिटर्न निश्चित नहीं होता। शेयर बाजार में तेजी रहेगी तो बेहतर रिटर्न मिल सकता है, जबकि गिरावट के दौर में पोर्टफोलियो की वैल्यू घट भी सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबी अवधि में बाजार की अस्थिरता का असर काफी हद तक संतुलित हो जाता है और नुकसान का जोखिम कम हो जाता है।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि SIP से होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में एक साल से ज्यादा निवेश रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है। इसलिए निवेश से पहले अपनी वित्तीय योजना, जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्य को स्पष्ट करना जरूरी है।
नियमित और धैर्यपूर्ण निवेश से ही SIP का असली लाभ मिलता है। छोटी-छोटी बचत लंबे समय में आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती है।





