नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । अगले साल मार्च 2027 से दिल्ली से माता वैष्णो देवी के दर्शनों के लिए केवल 6 घंटे का सफर होगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का निर्माण कर रही है, जो इस लंबे समय के सफर को आसान और तेज बना देगा। करीब 600 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली, गुरु नगरी अमृतसर और माता वैष्णो देवी के बेस स्टेशन कटरा को जोड़ा जाएगा।
श्रद्धालुओं को समय बचाने का लाभ मिलेगा
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजीव कुमार ने बताया कि अगर निर्माण योजना अनुसार चलता है, तो मार्च 2027 तक यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। इसके पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को लंबा समय बचाने का लाभ मिलेगा और यात्रा और भी सुविधाजनक होगी।
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से होंगे कई लाभ
राजीव कुमार ने बताया कि नई एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि इससे आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक विकास भी होगा। उन्होंने बताया “जहां सड़क जाएगी वहां व्यापार और नए अवसर बढ़ेंगे। आजकल लोगों के पास गाड़ियां हैं और वे लंबी दूरी की यात्रा सड़क के माध्यम से करना पसंद करते हैं। अगर 5-6 घंटे में यात्रा पूरी हो सके तो युवा सड़क यात्रा को एयरपोर्ट की तुलना में ज्यादा पसंद करेंगे।” राजीव कुमार ने यह भी कहा कि अच्छी हाईवे के कारण लोग फ्लाइट की जगह रोड को चुनते हैं, क्योंकि एयरपोर्ट पर जाने और वेट करने में काफी समय बर्बाद होता है।
निर्माण में 6 महीने की देरी
राजीव कुमार ने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण में करीब 6 महीने की देरी हुई। इसका कारण साल 2025 में जम्मू-कश्मीर में हुए कुछ अप्रत्याशित घटनाक्रम थे। राजीव कुमार ने कहा “पिछला साल काफी चुनौतियों भरा रहा। पहलगाम हमले के बाद इलाके का नाम सुनते ही लोगों में डर पैदा हो गया। जम्मू से कई मजदूर पलायन कर गए, जिन्हें वापस लाना पड़ा और ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया। उसी दौरान जब हालात संभाले जा रहे थे, जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आ गई। इस बाढ़ से कई पुल और निर्माण सामग्री प्रभावित हुए।” उन्होंने आगे कहा कि इस बाढ़ के कारण एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए जरूरी सामान की सप्लाई में काफी दिक्कतें आईं और साल 2025 में केवल 5-6 महीने ही काम हो पाया।
निर्माण में चुनौतियां और तकनीकी समाधान
राजीव कुमार ने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण में कई तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू में बन रहे इस हाईवे के लिए राइट ऑफ वे यानी सड़क की चौड़ाई 45 मीटर निर्धारित थी, जो अपने आप में चुनौतीपूर्ण था। इस हाईवे पर रोजाना लगभग 20 हजार वाहन चलते हैं। ऐसे में निर्माण के दौरान ट्रैफिक प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती थी।
स्पेशल सेगमेंट तकनीक
राजीव कुमार ने बताया कि ट्रैफिक में बाधा न आए और फ्लाईओवर निर्माण के लिए शटरिंग का काम बाधित न हो, इसके लिए हमने विशेष सेगमेंट तकनीक अपनाई। इन सेगमेंट्स को नई तकनीक से बनाया गया, जिससे निर्माण तेजी से पूरा हुआ और यातायात पर कोई असर नहीं पड़ा। इस तकनीकी समाधान के कारण निर्माण का काम अपेक्षित समय में तेजी से हुआ।





