नई दिल्ली/रफ्तार डेेेस्क। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों को राहत देते हुए हायर पेंशन (Higher Pension) से जुड़ा एक अहम प्रावधान फिर से बहाल कर दिया है। अब पात्र कर्मचारी अपने वास्तविक मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) के आधार पर अधिक पेंशन योगदान का विकल्प चुन सकेंगे। इससे रिटायरमेंट के बाद ज्यादा मासिक पेंशन पाने का रास्ता खुल गया है।
क्या है पूरा मामला?
1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारियों को अपने वास्तविक वेतन के आधार पर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में अधिक योगदान देने का विकल्प मिलता था। खासकर सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के कर्मचारियों को इसका बड़ा फायदा होता था। लेकिन 2014 में नियमों में बदलाव के बाद पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये तय कर दी गई।
EPS के तहत अधिकतम पेंशन योग्य वेतन
इस सीमा के कारण EPS के तहत अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये ही माना जाने लगा, जिससे अधिकतम संभावित मासिक पेंशन करीब 7,500 रुपये तक सीमित हो गई। इसके बाद जिन कर्मचारियों का वेतन इससे अधिक था, वे वास्तविक सैलरी के आधार पर पेंशन योगदान नहीं कर सकते थे।
अभी कैसे होता है EPF-EPS का कैलकुलेशन?
मौजूदा नियमों के अनुसार, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी + DA का 12% EPF खाते में जमा करते हैं।
नियोक्ता के योगदान में से 8.33% हिस्सा EPS (पेंशन स्कीम) में जाता है।
शेष 3.67% हिस्सा EPF खाते में जमा होता है।
EPS में जमा राशि के आधार पर रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन मिलती है।
अब किसे मिलेगा फायदा?
सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार, यह कोई नई स्कीम नहीं है, बल्कि पुराने प्रावधान की बहाली है। इसका लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था या इसके पात्र थे। यानी यह सुविधा सभी EPFO सदस्यों पर लागू नहीं होगी।
क्या है इसका महत्व?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से 2014 के बाद वेतन सीमा को लेकर चली आ रही भ्रम की स्थिति काफी हद तक साफ होगी। हालांकि, ज्यादा पेंशन पाने के लिए कर्मचारियों को अपने EPF बैलेंस से अतिरिक्त राशि EPS में ट्रांसफर करनी पड़ सकती है।कुल मिलाकर, यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत है जो रिटायरमेंट के बाद अधिक और स्थिर पेंशन चाहते हैं।





