नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में भारतीय टीम की शुरुआत निराशाजनक रही। भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 76 रनों की करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया 111 रन पर सिमट गई और पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल सकी। इस हार ने न केवल बल्लेबाजी क्रम की कमजोरियों को उजागर किया, बल्कि कुछ खिलाड़ियों की रणनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
नंबर-3 पर उम्मीद, लेकिन जल्दबाजी भारी
पारी की शुरुआत में ही एडेन मार्करम ने ईशान किशन को आउट कर भारत को बड़ा झटका दिया। ऐसे में नंबर-3 पर उतरे तिलक वर्मा से पारी को संभालने की उम्मीद थी। जरूरी रनरेट 10 से कम था और पावरप्ले में पर्याप्त समय मौजूद था। मगर तिलक ने आक्रामक शॉट खेलने की जल्दबाजी दिखाई। मार्को जानसेन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में वह विकेटकीपर क्विंटन डिकॉक को कैच दे बैठे। महज 1 रन बनाकर उनकी वापसी ने दबाव और बढ़ा दिया। इसके बाद विकेटों का पतन जारी रहा और टीम संभल नहीं सकी।
गावस्कर की दो टूक: समझदारी दिखानी थी
मैच के बाद पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने तिलक की अप्रोच पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “वह समझदार बल्लेबाज हैं, लेकिन उस समय संयम जरूरी था। एक विकेट गिर चुका था, रनरेट 9.5 था, 15 नहीं। आपको साझेदारी बनानी चाहिए थी। 55-60 रन भी पावरप्ले में बन जाते तो टीम मजबूत स्थिति में होती।” गावस्कर के अनुसार, ऐसे अहम मुकाबलों में जिम्मेदारी लेकर खेलना जरूरी होता है, खासकर जब शीर्ष क्रम पहले ही दबाव में हो।
आंकड़े मजबूत, प्रदर्शन फीका
मौजूदा टूर्नामेंट में तिलक वर्मा का प्रदर्शन औसत रहा है। पांच मैचों में उन्होंने 107 रन बनाए हैं, जो उनके टी20 स्तर के मुताबिक कम हैं। खास बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनका पिछला रिकॉर्ड शानदार रहा है-10 टी20 में 496 रन, दो शतक और दो अर्धशतक। लेकिन इस अहम मुकाबले में वह अपनी लय नहीं दोहरा सके। यही वजह है कि उनकी भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं।
क्या होगा बदलाव? संजू सैमसन की एंट्री संभव
टॉप ऑर्डर की नाकामी के बीच नंबर-3 की भूमिका और अहम हो गई है। सहायक कोच रयान टेन डोशेट ने संकेत दिए हैं कि आगे बदलाव संभव है। संजू सैमसन ने नामीबिया के खिलाफ तेजतर्रार पारी खेलकर विकल्प के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत की है। सुपर-8 में जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले बाकी हैं, जहां टीम संतुलन साधने के लिए रणनीतिक फैसले ले सकती है। करारी हार के बाद अब निगाहें टीम मैनेजमेंट पर हैं-क्या तिलक को एक और मौका मिलेगा या संयोजन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?





