नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आजकल ज्यादातर लोग रोजमर्रा के खर्च, ऑनलाइन शॉपिंग या पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के भुगतान के लिए EMI (इक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट) का सहारा लेते हैं। लेकिन केवल एक EMI चूकना भी आपके वित्तीय भविष्य पर भारी पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक मिस्ड पेमेंट आपके क्रेडिट स्कोर को गिरा सकता है और भविष्य में मिलने वाले लोन महंगे हो सकते हैं, जिससे पूरे टेन्योर में हजारों रुपये अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
क्रेडिट कार्ड बिल न चुकाने के नुकसान
कभी-कभी एक छोटी सी लापरवाही आपके वित्तीय भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर आप अपनी लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड की एक किस्त समय पर नहीं चुकाते हैं, तो यह सिर्फ मामूली चूक नहीं रह जाती। TransUnion CIBIL और Experian India जैसी क्रेडिट एजेंसियां हर महीने का भुगतान रिकॉर्ड रखती हैं, जो 36 महीने तक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखाई देता है।
EMI छूटना: छोटी गलती, बड़ा असर
रीपेमेंट हिस्ट्री क्रेडिट स्कोर का सबसे अहम हिस्सा होती है। ज्यादातर स्कोरिंग मॉडल में इसका वेटेज करीब 30% होता है। यानी अगर भुगतान में एक भी बड़ी चूक हो जाए तो स्कोर में साफ गिरावट आ सकती है। एक मिस्ड पेमेंट का असर दो साल तक रह सकता है, जबकि लेट पेमेंट की एंट्री 36 महीने तक क्रेडिट रिपोर्ट में बनी रहती है।
30 दिन की देरी क्यों महत्वपूर्ण
क्रेडिट स्कोर पर EMI या बिल की 30 दिन से ज्यादा देरी का असर तुरंत दिखाई देता है। ZET के सीईओ मनीष शरा कहते हैं कि रीपेमेंट हिस्ट्री स्कोर का सबसे बड़ा निर्धारक है। अगर देरी 30 दिन से ज्यादा हो जाए तो न सिर्फ स्कोर गिरता है बल्कि भविष्य में लोन लेने पर ब्याज दर बढ़ जाती है।
कम स्कोर का सीधा आर्थिक नुकसान
कम क्रेडिट स्कोर सिर्फ नंबर में गिरावट नहीं है, बल्कि आपकी जेब पर भी भारी पड़ता है। उदाहरण के लिए, अगर 10 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए लिया जाए और स्कोर 750 से ऊपर है, तो ब्याज दर 10.5% से 12% हो सकती है। लेकिन स्कोर गिरकर 700 से नीचे चला जाए, तो ब्याज दर 14% तक बढ़ सकती है, जिससे पूरे टेन्योर में 90,000 रुपये से ज्यादा अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।
क्रेडिट स्कोर सुधारने के उपाय
एक मिस्ड पेमेंट के बाद स्कोर धीरे-धीरे सुधर सकता है। Kiwi के को-फाउंडर अनूप अग्रवाल का कहना है कि नियमित समय पर भुगतान जारी रखने से 6 से 12 महीने में सुधार दिखता है। SURE के विकास ताराचंदानी और Fibe के अक्षय मेहरोत्रा भी मानते हैं कि अगर आगे समय पर पेमेंट होता रहे तो असर स्थायी नहीं होता।
EMI चूकने पर तुरंत करें ये कदम
EMI चूक जाने पर सबसे पहले बकाया रकम तुरंत चुकाएं। अगर देरी तकनीकी कारण से हुई है, तो लेंडर को तुरंत इसकी जानकारी दें। भविष्य में ऐसी देरी न हो, इसका खास ध्यान रखें। इसके लिए ऑटो डेबिट सेट करें और खाते में हमेशा थोड़ा अतिरिक्त बैलेंस रखें। साथ ही, ड्यू डेट से पहले रिमाइंडर लगाएं और क्रेडिट कार्ड लिमिट का संतुलित इस्तेमाल सुनिश्चित करें।





