नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली आमलकी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन इसका संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से भी जोड़ा जाता है। खासकर नवविवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत दांपत्य सुख, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
आमलकी एकादशी 2026: शुभ तिथि और महत्व
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को यह व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा के साथ आंवले के वृक्ष का पूजन विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि आंवले का वृक्ष स्वयं भगवान विष्णु को प्रिय है और इसकी पूजा करने से श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नवविवाहित महिलाओं के लिए क्यों है खास?
मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे, इसलिए इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है। नवविवाहित महिलाएं यदि विवाह के शुरुआती वर्षों में यह व्रत रखती हैं, तो उन्हें माता पार्वती और भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है, वैवाहिक बाधाएं दूर होती हैं, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है और संतान प्राप्ति की कामना भी पूर्ण होती है।
स्वास्थ्य का वरदान और आमलकी एकादशी के विशेष उपाय
‘आमलकी’ का अर्थ है आंवला, जिसे आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा और उसका सेवन करने से आरोग्य, शारीरिक शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य लाभ का यह सुंदर संगम आमलकी एकादशी को और भी खास बना देता है।
इस पावन दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करें-जड़ में जल अर्पित करें, दीप जलाएं और परिक्रमा करें। साथ ही भगवान विष्णु का पूजन कर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और फलाहार व्रत रखें। आंवले का दान और सेवन अत्यंत शुभ माना गया है। रंगभरी एकादशी के अवसर पर शिव-पार्वती और विष्णु भगवान को गुलाल अर्पित कर भक्तिभाव से प्रार्थना करना भी मंगलकारी माना जाता है।
पौराणिक मान्यता और आंवला व्रत के आध्यात्मिक लाभ
शास्त्रों में मान्यता है कि आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति भगवान विष्णु के आंसुओं से हुई, इसलिए इसकी पूजा को सीधे श्रीहरि की आराधना माना जाता है। आंवला व्रत को करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही यह व्रत आर्थिक उन्नति, लक्ष्मी-नारायण की कृपा, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्रदान करने वाला माना गया है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बना रहता है।





