नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को यूजीसी इक्विटी नियम को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ ने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाते हुए राज्य सरकार से इस नियम को लागू करने की मांग की। बहस के दौरान उन्होंने ब्राह्मणवादी मानसिकता शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव का मुद्दा उठाया
संदीप सौरभ ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने 2016 में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला, 2019 में मुंबई के एक मेडिकल कॉलेज की छात्रा पायल और 2023 में आईआईटी मुंबई के छात्र दर्शन सोलंकी का उदाहरण देते हुए कहा कि कैंपस में जातिगत भेदभाव गंभीर समस्या है। उन्होंने दावा किया कि 2019 से 2024 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
बीजेपी ने किया कड़ा विरोध
“ब्राह्मणवादी मानसिकता” शब्द पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भड़क गए। उन्होंने कहा कि इस तरह के शब्द समाज में जहर घोलते हैं और राष्ट्र को कमजोर करते हैं। विजय सिन्हा ने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे खुद भी रैगिंग का शिकार हुए थे, लेकिन उन्होंने किसी जाति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराया।
स्पीकर ने शब्द हटाने का दिया निर्देश
हंगामा बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने ब्राह्मण शब्द को कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी कुछ समय तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रही। फिलहाल, यूजीसी इक्विटी नियम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और सदन में इस मुद्दे पर आगे भी चर्चा होने की संभावना है। यह समस्या हर समाज के लिए है। मैं भी टेक्निकल कॉलेज में पढ़ने के लिए गया था, उस समय सत्ता किसकी थी? मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से आता हूं। मेरी मुजफ्फरपुर में रैगिंग की गई। हॉस्टल से बाहर निकलने के लिए विवश किया गया। इस मानसिकता पर प्रश्न उठना चाहिए। जातिगत भेदभाव करने वाले, बाबा भीमराव आंबेडकर के जाति विहीन समाज के सपने को तार-तार करने की मानसिकता वाले लोग राष्ट्र के हितैषी नहीं हैं। ये राष्ट्र को कमजोर करना चाहते हैं। ये समाज के साथ गद्दारी करते हैं। इसके बाद सदन में विपक्ष ने काफी शोर शुरू कर दिया।





