नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को उस वक्त गरमा गया, जब संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। अडानी समूह के साथ बिजली खरीद समझौते को लेकर शुरू हुई बहस इतनी बढ़ी कि विजयवर्गीय ने सिंघार को “अपनी औकात में रहने” की टिप्पणी कर दी। इस कथन से सदन में जोरदार हंगामा खड़ा हो गया और विपक्ष ने इसे असंसदीय बताते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग कर दी।
अडानी समझौते पर आरोप-प्रत्यारोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली में बिजली खरीद को लेकर सरकार और अडानी समूह के बीच हुए करार पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि सरकार अगले 25 वर्षों में कंपनी को करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी में है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को भ्रामक बताया। उमंग सिंघार ने दस्तावेजी प्रमाण देने की बात कही, जिसके बाद बहस तीखी हो गई और मामला व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया। विपक्ष ने कहा कि यह टिप्पणी केवल नेता प्रतिपक्ष का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता का अपमान है।
CM ने मांगी माफी
स्थिति बिगड़ती देख विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की गरिमा पर चिंता जताई। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हस्तक्षेप करते हुए ‘जाने-अनजाने’ हुई गलती के लिए सदन से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा की मर्यादा सर्वोपरि है और भाषा की शालीनता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
सदन के बाहर भी बरकरार रहे कैलाश विजयवर्गीय के तेवर
हालांकि सदन के भीतर माफी के बाद माहौल कुछ शांत हुआ, लेकिन बाहर मीडिया से बातचीत में कैलाश विजयवर्गीय के तेवर नरम नहीं दिखे। उन्होंने कहा, “कई बार हो जाता है यार… यह बहुत सामान्य बात है।” मुख्यमंत्री द्वारा माफी मांगने पर उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री कप्तान हैं, उन्होंने माफी मांग ली तो क्या हो गया।” उन्होंने इसे मानवीय प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि कभी-कभी गुस्सा आ जाता है।
उमंग सिंघार का पलटवार
उमंग सिंघार ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि “उम्रदराज नेताओं को राजनीति में पहलवानी नहीं करनी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे अडानी समूह और अन्य मुद्दों पर प्रमाण के साथ सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार असहज हो रही है।
राजनीतिक तापमान तेज
इस घटनाक्रम ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नया तापमान ला दिया है। जहां सत्ता पक्ष इसे बहस का सामान्य हिस्सा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात करार दे रहा है। बजट सत्र के बीच इस टकराव ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।





