नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर छठ पूजा का विधान है। ऐसे में इस साल मंगलवार 25 अक्टूबर से आस्था के महापर्व यानी छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है। छठ पूजा के दूसरे दिन खरना किया जाता है जिसमें व्यक्ति को स्वच्छता और शुद्धता का पूर्ण रूप से ख्याल रखना होता है।कहा जाता है कि छठी मैया का व्रत करने से साधक के साथ-साथ उसके परिवार को भी स्वास्थ्य और संपन्नता का आशीर्वाद मिलता है। यह एक कठिन व्रत माना जाता है, क्योंकि इसमें 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखा जाता है। इसके साथ ही पूजा अर्चना करते समय आपको सूर्य भगवान के इन चमत्कारी मंत्रों का भी जब करना चाहिए।
पूजा विधि
छठ पर्व के दूसरे दिन यानी खरना पर सुबह से लेकर शाम तक उपवास किया जाता हैं। सबसे पहले सुबह की तैयारी में व्रती या उपवासी सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हैं। इसके बाद पूरे दिन के लिए निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसका अर्थ है कि न तो भोजन किया जाता है और न ही पानी पिया जाता है।पूजा की तैयारियों में साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। खरना पूजा में शाम के समय प्रसाद बनाया जाता है। प्रसाद के माध्यम से डूबते सूर्य और छठी मइया को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। अर्घ्य के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करके दिनभर का व्रत तोड़ते हैं।
खरना के दिन बनता है ये प्रसाद
इस दिन शाम के समय छठी मैया की पूजा के लिए प्रसाद मुख्य रूप से गुड़ और चावल की खीर तैयार की जाती है, जिसे मिट्टी के नए चूल्हे पर बनाया जाता है। इस खीर को ग्रहण करने के बाद फिर से निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। इसके साथ रोटी, केला और अन्य बिना नमक, प्याज-लहसुन के व्यंजन प्रसाद में शामिल होते हैं। छठी मैया को भोग लगाने के बाद जरूरतमंद लोगों को भी प्रसाद बांटें। ऐसा करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
इन मंत्रों का करें जाप
एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर. घृणि सूर्याय नमः ।।’
‘ॐ सूर्याय नम:।।’
‘ॐ घृणि सूर्याय नम:।।’
‘ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।।’
‘ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:।।’
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