नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आयकर विभाग ने फर्जी डोनेशन दिखाकर टैक्स रिफंड लेने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले कई करदाताओं ने राजनीतिक दलों या चैरिटेबल संस्थाओं को कथित चंदा देने का झूठा दावा कर रिफंड की मांग की, लेकिन अब ऐसे मामलों की गहन जांच शुरू हो गई है। अधिकारियों ने साफ किया कि रिटर्न में किए गए दावों की असामान्यता पर विशेष नजर रखी जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
फर्जी दस्तावेज और एजेंट्स का नेटवर्क
जांच के दौरान पता चला है कि कई टैक्सपेयर्स ने सीधे संस्थाओं को दान न देकर एजेंट या बिचौलियों के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। यह नेटवर्क करदाताओं को यह भरोसा दिलाता था कि फर्जी रसीदों के जरिए रिफंड अधिक मिलेगा। इन दस्तावेजों में फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट की रसीदें, अनरिकॉग्नाइज्ड राजनीतिक दलों के नाम पर चंदे की रसीदें और अन्य नकली रिकॉर्ड शामिल थे।
रिफंड में देरी का बड़ा कारण
आयकर अधिकारियों के मुताबिक, रिफंड में देरी का एक बड़ा कारण भी यही है कि अब रिटर्न में किए गए दावों की बारीकी से जांच की जा रही है। खासतौर पर उन मामलों को टारगेट किया गया है, जहां टैक्स छूट और रिफंड का दावा असामान्य रूप से ज्यादा है। विभाग ने चेताया है कि फर्जी दावे करने वालों का रिफंड रोका जाएगा और उन पर पेनल्टी, ब्याज और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
विभाग की सख्त चेतावनी और अपील
आयकर विभाग ने ईमानदार करदाताओं से अपील की है कि केवल वास्तविक और वैध डोनेशन पर ही टैक्स छूट का दावा करें। किसी भी एजेंट या बिचौलिए के झांसे में न आएं। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी दस्तावेजों की सही तरीके से जांच करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी परेशानी से बचा जा सके।
आयकर विभाग का यह कदम टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी रिफंड के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब फर्जी डोनेशन दिखाकर रिफंड लेने वालों के लिए रास्ता मुश्किल हो गया है और विभाग की सख्ती के चलते इस तरह के प्रयासों पर शिकंजा कसा जाएगा।





