नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आप स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं और यह मानते हैं कि बिना लिंक और बिना ऐप डाउनलोड किए कोई ठगी संभव नहीं है, तो यह खबर आपकी आंखें खोलने वाली है। साइबर ठगों ने अब ऐसा तरीका खोज लिया है जिसमें न तो फर्जी वेबसाइट होती है, न ही किसी अनजान ऐप की जरूरत। बस एक कॉल या मैसेज और कुछ सेकंड में आपकी मेहनत की कमाई खतरे में पड़ सकती है। गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने देशभर के स्मार्टफोन यूजर्स के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। साफ कहा गया है कि अगर आपने हाल ही में किसी के कहने पर कोई अज्ञात USSD कोड डायल किया है, तब तुरंत अपनी कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स जांचें। थोड़ी सी देरी आपका बैंक अकाउंट, UPI और सोशल मीडिया सब कुछ खाली कर सकती है।
कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम क्या है और क्यों है खतरनाक?
अब तक ज्यादातर लोग फर्जी लिंक, ईमेल और नकली ऐप्स से होने वाली ठगी से परिचित हो चुके थे। लेकिन यह नया स्कैम इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें मोबाइल के एक भरोसेमंद फीचर कॉल फॉरवर्डिंग का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ठगी में यूजर को 21, 61 या 67 से शुरू होने वाला कोई कोड डायल करने को कहा जाता है। जैसे ही यह कोड डायल होता है, फोन की सभी इनकमिंग कॉल्स किसी दूसरे नंबर पर जोकि आपका नहीं है किसी ठग का है पर फॉरवर्ड हो जाती हैं।
बैंक से आने वाले OTP कॉल, UPI वेरिफिकेशन
दरअसल इसका सीधा असर यह होता है कि बैंक से आने वाले OTP कॉल, UPI वेरिफिकेशन और जरूरी अलर्ट सीधे साइबर ठग तक पहुंच जाते हैं। यूजर को तब तक कुछ पता नहीं चलता, जब तक अकाउंट से पैसे गायब नहीं हो जाते।
जानिए पूरा तरीका, इस तरह से फंसाया जाता है
I4C के अनुसार यह स्कैम पूरी तरह सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित है। ठग पहले भरोसा जीतते हैं और फिर चाल चलते हैं अक्सर वे खुद को कूरियर कंपनी का एजेंट, डिलीवरी बॉय, बैंक अधिकारी या सरकारी सर्वे का प्रतिनिधि बताते हैं।
उदाहरण के तौर पर कॉल आती है कि आपके नाम से पार्सल आया है लेकिन एड्रेस में गड़बड़ी है। इसे ठीक करने के लिए तुरंत एक कोड डायल करने को कहा जाता है। इसके साथ ही एक मैसेज भी भेजा जाता है, जिसमें वही USSD कोड लिखा होता है। चूंकि USSD कोड बैलेंस चेक जैसी सेवाओं में आमतौर पर इस्तेमाल होते हैं, इसलिए यूजर को शक नहीं होता। कोड डायल होते ही बैंक का OTP ठग को मिलने लगता है। PhonePe, Google Pay और WhatsApp जैसे ऐप्स का कंट्रोल उनके हाथ में चला जाता है। कुछ ही मिनटों में खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं
डराने वाले आंकड़े है सामने
I4C की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन महीनों में ही इस स्कैम से जुड़ी पांच हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुई हैं। इन मामलों में करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। साल 2025 में कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम से जुड़ी करीब 1.2 लाख शिकायतें सामने आईं, जो 2024 के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा हैं।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और इंदौर, पटना, हैदराबाद जैसे बड़े शहर इस समय इस ठगी के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। भोपाल में हाल ही में एक व्यापारी से 8 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया। जांच में यह भी पता चला है कि कई गिरोह अंतरराष्ट्रीय नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं और विदेश से इस स्कैम को ऑपरेट कर रहे हैं।
तुरंत करें ये जरूरी सेटिंग्स, बच सकता है बड़ा नुकसान
गृह मंत्रालय और I4C ने साफ निर्देश दिए हैं, जिन्हें हर स्मार्टफोन यूजर को अभी फॉलो करना चाहिए। अपने फोन से *#21# या *#62# डायल करके कॉल फॉरवर्डिंग का स्टेटस जांचें। अगर कोई अनजान नंबर दिखे तो तुरंत ##002# डायल करें। यह कोड सभी तरह की कॉल फॉरवर्डिंग को बंद कर देता है। चाहें तो ##21#, ##61# और ##67# भी डायल कर सकते हैं। इसके बाद फोन को एक बार रीस्टार्ट करें। यदि OTP मिस हुए हों तो तुरंत बैंक पासवर्ड बदलें और बैंक को सूचित करें। ये स्टेप्स Android और iOS दोनों फोन में काम करते हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
I4C का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह की ठगी के मामले और बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग खुद भी सतर्क रहें और परिवार को भी जागरूक करें, खासकर बुजुर्गों को। कभी भी अनजान USSD कोड डायल न करें। अज्ञात कॉल्स पर भरोसा न करें। टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन को SMS की बजाय ऐप आधारित रखें। किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
साइबर विशेषज्ञ डॉ. अमित पाण्डेय का मानना है कि एक पल की समझदारी और जागरूकता लाखों रुपये बचा सकती है। डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ खतरे भी हैं। इसलिए यदि जरा सा भी शक हो, तब ऐसी स्थिति में तुरंत कॉल फॉरवर्डिंग बंद करें और खुद को सुरक्षित रखें।





