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Friday, March 20, 2026
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सुस्ती – Lethargy (sustee) in Hindi

सुस्ती के बारे में – About Lethargy in Hindi

कई बार शरीर में स्फूर्ति (energy) नहीं रहती। शरीर एकदम थका हुआ महसूस करता है, और बहुत कमजोरी महसूस होती है। कई बार आलस इतना होता है कि हमेशा नींद आती रहती है। इसी अवस्था को लिथारजी या सुस्ती कहते हैं। तनावपूर्ण माहौल या पोषण की कमी के कारण शरीर कमजोर होने लगता है। कई बार रात में अच्छी नींद न सोने पर भी अगले दिन थका हुआ महसूस करते हैं। लेकिन ज्यादा सुस्ती शरीर के लिए बेहद हानिकारक भी है। कई बार यह सुस्ती मौत की वजह भी हो सकती है, क्योंकि ज्यादा सुस्ती से ब्रेन के सेल्स भी सुस्त होने लगते हैं और धीरे धीरे कार्य करना बंद कर देते हैं। पूरे शरीर की स्वभाविक प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जो कई समस्याओं का कारण हो सकती है। ऐसे में शरीर को एक्टिव बनाये रखना बेहद जरूरी होता है।

सुस्ती, निम्न बीमारियों का कारण भी हो सकती है – Effects of Lethargy in Hindi

1. हृदय रोग – Heart Diseases

जिस किसी भी व्यक्ति को हृदय रोग होता है या हार्ट अटैक आता है, चिकित्सक बताते हैं कि लगभग 70 फीसदी मामलों में ऐसे व्यक्ति कुछ हफ्ते पहले से ही सुस्ती महसूस करने लगते हैं। पुरूषों के मुक़ाबले महिलाओं में यह लक्षण ज्यादा नजर आते हैं।

2. लिवर समस्या – Liver Problem

यदि कोई लगातार सुस्ती महसूस करे तो लीवर पर प्रभाव पड़ सकता है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन हो या कोई ड्रग लेने की लत हो तो हेपेटाइटिस सी की संभावना रहती है। हल्का बुखार, भूख न लगना और शरीर में दर्द इसके लक्षण हो सकते हैं।

3. एनीमिया – Anemia

शरीर में आयरन की कमी भी सुस्ती का कारण हो सकता है, खासकर महिलाओं में। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, फीडिंग के बाद महिलाओं में आयरन की कमी हो जाती है, जिससे रंग पीला पड़ने लगता है, चिड़चिड़ाहट शुरू हो जाती है और सुस्ती छाई रहती है।

4. थायरॉइड – Thyroid

कई बार थायरॉइड संबंधी समस्याएं भी सुस्ती (Susti) का संकेत हो सकती हैं, खासकर मध्यम उम्र के लोगों में। थायरॉइड ग्लैंड टी-4 और टी- 3 जैसे हार्मोन बनाती है, लेकिन मिड एज में यह प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

सुस्ती के लक्षण – Lethargy Symptoms in Hindi

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  • एकांत अच्छा लगना
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  • कमजोरी महसूस होना (Weakness in Body)
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  • किसी काम में मन न लगना
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  • छोटे से छोटा काम करने में चिड़चिड़ाना
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  • मन में हमेशा नकारात्मक विचार आना
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  • हर समय नींद और आलस आना
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  • हर समय लेटे रहने का मन होना
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सुस्ती के कारण – Lethargy Causes in Hindi

सुस्ती का अनुभव सभी को होता है, लेकिन थोड़ा आराम करने या रात की नींद के बाद, अगली सुबह तक सुस्ती दूर हो जाती है। यदि इसके बाद भी सुस्ती बनी रहे तो यह बीमारी का संकेत हो सकता है। किसी भी व्यक्ति की सुस्ती का असर न केवल उसके शारीरिक बल्कि मानसिक व सामाजिक स्तर पर भी पड़ता है। सुस्ती, व्यस्त दिनचर्या, खराब जीवन शैली, बीमारियां, अनियमित व असंतुलित खान-पान व अन्य कारणों से हो सकती है। आमतौर पर अच्छी नींद लेने और और दिनचर्या में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है लेकिन कई बार चिकित्सक की सलाह लेनी ही पड़ती है।

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  • कमजोरी की वजह से।
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  • ज्यादा तनावग्रस्त रहने से।
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  • नींद पूरी न होने की वजह से।
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  • शरीर में विटामिन की कमी से।
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  • शरीर में खून की कमी की वजह से।
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सुस्ती का उपचार – Lethargy Treatment in Hindi

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  • रोज योग और व्यायाम करें।
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  • सुबह की ताजी हवा में टहलें।
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  • तनावमुक्त रहने का प्रयास करें।
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  • खाने में विटामिन की मात्रा बढ़ाएं।
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  • कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लें।
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  • आंवले का मुरब्बा भी शरीर को स्फूर्ति देता है।
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  • हल्का संगीत, हल्की आवाज में सुनें। इससे भी मानसिक सुस्ती दूर होती है।
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  • कई बार सुगंधित तेलों की मालिश से भी शरीर की सुस्ती और सुस्ती मिटाई जा सकती है।
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  • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें, जिसमें हरी सब्जियां, दालें, दही और मौसमी फल शामिल हों।
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  • अपनी उंगलियों के पोरों से चेहरे की मसाज करें। ऐसा करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा, जिससे व्यक्ति एक्टिव महसूस करेगा।
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