नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गया है। 2022 में वनंत्रा रिजॉर्ट में काम करने वाली रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के बाद धामी सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया और जांच के बाद रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उनके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
राजनीतिक बहस और प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है
लंबी न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई के बाद मई 2025 में अदालत ने तीनों अभियुक्तों को हत्या का दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि कानून के तहत आरोपियों को जेल भेजा गया और किसी भी स्तर पर कोई ढील नहीं दी गई।
लेकिन इसके बावजूद मामला राजनीतिक बहस और प्रदर्शन का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है और आरोप लगा रही है कि मामले की जांच में कुछ पहलुओं को पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से नहीं देखा गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ बड़े और प्रभावशाली लोगों की भूमिका अब भी सवालों के घेरे में है और जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी इसे महिला सुरक्षा और न्याय से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है।
”कांग्रेस इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है”
वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि जब एसआईटी जांच पूरी हो चुकी है, आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, तब भी कांग्रेस लगातार प्रदर्शन कर रही है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को उठाकर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
एक प्रभावी राजनीतिक हथियार बनता नजर आता है?
विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस 2017 में सत्ता गंवाने के बाद लगातार ऐसे मुद्दों की तलाश में रही है, जो भावनात्मक रूप से जनता से जुड़ सकें। महिला अपराध, सुरक्षा और न्याय जैसे संवेदनशील मुद्दे जनता की भावनाओं को जल्दी भड़का सकते हैं। ऐसे में अंकिता भंडारी हत्याकांड कांग्रेस के लिए एक प्रभावी राजनीतिक हथियार बनता नजर आता है।
हालांकि, इस सियासी बहस के बीच यह सवाल भी अहम है कि क्या इससे अंकिता के परिवार को वास्तविक न्याय और संतोष मिल पा रहा है। सामाजिक संगठनों और आम लोगों का मानना है कि दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना न्याय की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन किसी बेटी के नाम पर लगातार राजनीति होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह भी सवाल उठता है कि…
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह भी सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक पार्टियां पीड़िता के परिवार और समाज की भावनाओं का सम्मान कर रही हैं या केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को हवा दे रही हैं। न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, दोषियों को सजा भी मिल चुकी है, लेकिन राजनीतिक प्रचार और प्रदर्शन इसे लगातार खबरों में बनाए रख रहे हैं।





