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Wednesday, March 11, 2026
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सालाना इनकम ₹12 लाख से ज्यादा है? आज ही करें ये 4 निवेश, टैक्स भी बचेगा और रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित

अगर आपकी सालाना इनकम 12 लाख से ज्यादा है, तो NPS, PPF, ELSS और पेंशन प्लान में निवेश कर टैक्स बोझ घटाने के साथ रिटायरमेंट को भी सुरक्षित बनाया जा सकता है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क।  बजट 2026 में भले ही इनकम टैक्स स्लैब में बड़ी राहत न मिली हो, लेकिन पुरानी टैक्स रिजीम आज भी मिडिल और हाई इनकम टैक्सपेयर्स के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। खासतौर पर जिनकी सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है, वे सही टैक्स प्लानिंग और स्मार्ट निवेश के जरिए न सिर्फ टैक्स बोझ काफी हद तक कम कर सकते हैं, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल फाउंडेशन भी तैयार कर सकते हैं। कुछ निवेश विकल्प ऐसे हैं जो टैक्स सेविंग और भविष्य की सुरक्षा-दोनों का डबल फायदा देते हैं।

1. नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)

हाई इनकम वालों के लिए NPS सबसे असरदार टैक्स सेविंग टूल माना जाता है। सेक्शन 80CCD(1B) के तहत इसमें 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग है। यानी सीधे-सीधे टैक्सेबल इनकम घटती है। NPS में इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश होता है, जिससे लंबे समय में 10–12% तक रिटर्न की संभावना रहती है। रिटायरमेंट के समय 60% राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि शेष रकम से नियमित पेंशन मिलती है।

2. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)

जो निवेशक जोखिम से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए PPF एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प है। इसमें सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1% का फिक्स्ड और पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न मिल रहा है। 15 साल की लंबी अवधि और कंपाउंडिंग का फायदा इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहद मजबूत बनाता है।

3. इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)

अगर आप टैक्स बचाने के साथ ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो ELSS एक अच्छा विकल्प है। इसमें भी 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है।

ELSS फंड्स का लॉक-इन पीरियड सिर्फ 3 साल होता है और ये इक्विटी में निवेश करते हैं। लंबे समय में 12–15% तक रिटर्न की संभावना रहती है, हालांकि इसमें बाजार से जुड़ा जोखिम भी होता है।

4. ULIP और पेंशन प्लान

ULIP और पेंशन प्लान हाई इनकम ग्रुप के लिए एक और स्मार्ट विकल्प हैं। इनमें 80C या 80CCC के तहत टैक्स छूट मिलती है और सेक्शन 10(10D) के तहत मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स-फ्री हो सकता है। ULIP में इंश्योरेंस और निवेश दोनों का फायदा मिलता है, जबकि पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करने में मदद करते हैं।

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